सोमवार, 26 अक्टूबर 2026

सरल बनो |

 सरल बनो | 

सरल बनो तुम उस दुनिया में , जहाँ हर कोई होना चाहता है सोफिस्टिकेटेड !


जहाँ लोग छींकने के बाद कहते है एक्सक्यूज़ मी | 

तुम कहना सीखो - हे राम !

दुनिया में जहाँ लोग मानते है , सभ्यता टीसू से पोंछने में , 

खाने में फोर्क से , ऐसे ऐसे खाने जिनके नाम लेने में भी जीभ खाती है मरोड़ा | 

तुम लो रात के दूध की मलाई , जमाओ उसे बासी रोटी पर 

बुरको उस पर थोड़ी चीनी 

और बीड़ा बनाकर ऐसे खाओ जैसे कोई ना देखता हो | 


स्वैग है आजकल सरल होने में ही | 


शर्माते हो ? तो क्या याद दिलाऊ | 

याद दिलाऊ कि उस दादा की वंशबेल पर उगी हुई पत्ती  हो तुम ,

दादा जो भरी सभा में छोड़ देते थे वायु ,

बिना दबाये , बिना लजाये 

और कह देते थे बस इतना कि हरिओम , हरिओम ! 

 सरल बनो | 

सरल बनो तुम उस दुनिया में , जहाँ हर कोई होना चाहता है सोफिस्टिकेटेड !

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