सरल बनो |
सरल बनो तुम उस दुनिया में , जहाँ हर कोई होना चाहता है सोफिस्टिकेटेड !
जहाँ लोग छींकने के बाद कहते है एक्सक्यूज़ मी |
तुम कहना सीखो - हे राम !
दुनिया में जहाँ लोग मानते है , सभ्यता टीसू से पोंछने में ,
खाने में फोर्क से , ऐसे ऐसे खाने जिनके नाम लेने में भी जीभ खाती है मरोड़ा |
तुम लो रात के दूध की मलाई , जमाओ उसे बासी रोटी पर
बुरको उस पर थोड़ी चीनी
और बीड़ा बनाकर ऐसे खाओ जैसे कोई ना देखता हो |
स्वैग है आजकल सरल होने में ही |
शर्माते हो ? तो क्या याद दिलाऊ |
याद दिलाऊ कि उस दादा की वंशबेल पर उगी हुई पत्ती हो तुम ,
दादा जो भरी सभा में छोड़ देते थे वायु ,
बिना दबाये , बिना लजाये
और कह देते थे बस इतना कि हरिओम , हरिओम !
सरल बनो |
सरल बनो तुम उस दुनिया में , जहाँ हर कोई होना चाहता है सोफिस्टिकेटेड !
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