लड़के जो छूट जाते हैं , तरक्की की राह में , पीछे |
रह जाते हैं गाँव में |
ऐसे 'नाकाम ' लड़कों के सहारे ही चलते हैं , परिवारों के सारे काम |
Simple and short Hindi stories from day to day life
लड़के जो छूट जाते हैं , तरक्की की राह में , पीछे |
रह जाते हैं गाँव में |
ऐसे 'नाकाम ' लड़कों के सहारे ही चलते हैं , परिवारों के सारे काम |
डरता हूँ मैं कई बार नौकरी छोड़ देने के विचार से
तमाम थकान के बावजूद |
इस विचार से कि उस दुनिया में जहाँ हर वो आदमी जो काम पर नहीं है , नाकाम है !
उस दुनिया में कौन सा मुखौटा लेकर जाऊँगा |
अगर मेरे पास बताने के लिए कोई काम नहीं होगा
क्या तब भी ये दुनिया मुझे किसी काम का आदमी समझेगी ? डरता हूँ मैं |
हर बार तुम तोड़े नहीं जाओगे, प्यार में किये गए इंकार से !
कई बार तोड़े जाओगे, प्यार के इकरार से |
इकरार जो उस वक़्त आएगा ,जब न मौसम होगा, और ना ही हालात |
तुम्हे हलाक कर जायेगा कोई, इस एहसास से कि काश तुमने कोई संजीदा कोशिश की होती |
डरना तुम ऐसे इकरार से , और रोक देना उसे कहने से पहले ही , जो आये तुम्हारे पास ऐसे किसी मिज़ाज़ से |
क्योकि प्यार में मिला इंकार मामूली सा एक तमाचा है |
लेकिन गलत वक़्त का इकरार , देह में छूटा काँटा है !
कभी कभी
ऐसा किया कीजिये कि हो जाया कीजिये गायब उन जगहों से जहाँ तुम्हारी मौजूदगी को गैर जरूरी समझा जाता हो |
लोगो को थोड़ा चखने दीजिये, अपनी गैर मौजूदगी |
कभी कभी बिना किसी प्लान के उठाया कीजिये झोला, डाला कीजिये कोई किताब और जा बैठिये, कहीं भी |
किसी पार्क में , कही बहते पानी के किनारे |
देखिये कि कैसे कुदरत में कितनी ही गैर जरूरी चीजे है!
गिलहरी पेड़ पर चढ़ उतर रही है , खामखा |
चीटियाँ कतारों में भागी जा रही है | बिलाबजह | जैसे जंग पे जाती हों |
छोटे छोटे बीटल्स फ़ालतू का कूड़ा कचरा धकेले ले जा रहे है | अपने बिलों में |
एहसास कीजिये
कि कैसे इन तमाम गैरजरूरी चीजों के जक्सटापोसिशन से ही दुनिया खूबसूरत बन पड़ी है |
सिंक होने दीजिये इस थॉट को कि कुदरत में कुछ भी ऐसा नहीं है, जो फ़ालतू है |
और फिर जाने दीजिये उन लोगों को जिन्हे लगता है कि तुम किसी काम के नहीं हो |
क्यों गिनी जाती हैं सारी बंदिशे औरतो के नाम
और सारी आजादियाँ मर्दो के नाम
क्यों माना जाता है घर की चारदीवारी को उम्रकैद
जबकि मैं अपने आस पास न जाने कितने ही ऐसे मर्दों को देखता हूँ जो खर्च हो रहे है
घर से बाहर ही , इस जतन में कि जुट जाए इतना भर कि जवानी में न सही बुढ़ापे में ही मयस्सर हो जाए घर की चारदीवारी |
सुनो , कभी कोसना मत किस्मत को , कि कब तक पापड़ बिलबायेगी |
कब तक आजमाएगी |
क्योकि इसी आजमाईश के बीच, इन्ही तनहा सफ़रों में कई बार किस्मत तुम्हारे सामने ऐसे शानदार नज़ारे खोलेगी कि देखने वाले कहेंगे कि सब नसीबों की बात है |
जानते हो ये विलायती शहर इतने सुन्दर क्यों होते है ?
क्योकि ये जवानियों पर फलते फूलते हैं |
इन नौकाओं में आती जवानियों पर |
जवानियाँ जो आती है दूरदराज के गाँवों से |
मेरे इलाके के गाँव से |
फिर वे सींचती है इन शहरों को , भरती हैं इनकी रगो में अपना खून |
और जब ये शहर उन जवानियों को निचोड़ चुके होते है , तब उनके बचे खुचे मलबे को वापस भेज देते है |
इन्ही नौकाओं में | उन्ही गावों में जहाँ से वे आये थे |
लड़के जो छूट जाते हैं , तरक्की की राह में , पीछे | रह जाते हैं गाँव में | ऐसे 'नाकाम ' लड़कों के सहारे ही चलते हैं , परिवारों के स...