शनिवार, 19 सितंबर 2026

असली कला

 वे कहते है कि लोगों को हँसाना एक कला है | 

मैं कहता हूँ कि वे लोग जो हँसते है दुनिया के सामने 

उन्हें अपने कंधे पर सर रखकर रो लेने देना असली कला है | 


लोग करते है फक्र सीनो को सजा भरी भरकम तमगों से 

मैं कहता हूँ उतार देना बोझ थोड़ा किसी के सीने से असली कला है 


दुनिया करती है प्यार उन्हें 

वे जो मासूम हैं , हसीं हैं , जवां हैं | 

प्यार करना उन्हें जिन्हे देखकर किसी को प्यार नहीं आता 

असली कला है | 


और ये दुनिया लगी है तमाम 

देवता हो जाने की होड़ में 

मैं कहता हूँ कि इंसानो की इस भीड़ में 

एक फकत इंसान हो पाना 

असली कला है 

बुधवार, 16 सितंबर 2026

टाइमपास

कभी गम मत मनाना इस बात का कि कोई तुम्हे महज टाइम पास समझकर , तुम्हारा इस्तेमाल कर आगे निकल गया | 
अपने किसी परमानेंट की तलाश में | 

हाँ , तुम बनना उनका टाइम पास , मगर इस हुनर से उनकी रूह की सलबटों में छुपा आओ कही अपना  रंग | 

रंग जो वक़्त के साथ उतरता जाए गहरा और गहरा | कुछ वैसे जैसे खजूर का काँटा वक़्त के साथ देह में गहरा और भी गहरा धँसता जाता है | 

और फिर तुम देखना दूर से ही  कि कैसे उनका परमानेंट फीका पड़ता जाता है तुम्हारे साथ किये गए टाइम पास की याद में | 

बुधवार, 9 सितंबर 2026

मेरी पोटली

अक्सर मैं ऐसा करता हूँ कि जब घूमने निकलता हूँ तो साथ लेकर चलता हूँ  एक पोटली | 
रखता हूँ उसमे कुछ छोटी ,कुछ बड़ी , कुछ दरमियानी , बेवफाइयाँ , हारें , मेरी शर्मिन्दगियां | 
कई बार उफनती नदी के पुल पर 
कभी रेलवे की पटरियों के पास 
तो किसी सुनसान कोने में 
मिल जाते है मुझे कुछ लोग | 

ऐसे लोग जिनका दुनियादारी से भरोसा उठ चूका होता है | 

और मैं कहता हूँ उनसे कि कुछ भी तो नहीं है मेरे पास जो ठीक कर सके वो सब जो तुम्हारे साथ हुआ है | 

लेकिन जाने से पहले सुनाकर जाओ मुझे , अपनी हार , बेवफाई , अपनी शर्मिंदगी का किस्सा | 

और मैं चुपचाप सुनता हूँ कि कैसे भरी दुनिया में कोई भी उनसे ज्यादा बदनसीब आदमी नहीं है | 

फिर मैं टटोलता हूँ अपनी पोटली और ढूंढ निकालता हूँ कोई एक अच्छी सी हार , एक बेवफाई , एक शर्मिंदगी | 
इतनी बड़ी कि उसके आगे उनकी छोटी पड जाए !

मैं सुनाता हूँ उन्हें कि कैसे मंदिर के कूड़ेदान से उठाया गया मुझे | 
कैसे शादी के कार्ड छपने के बाद भाग गयी थी मेरी पहली और आखिरी मंगेतर | 

कैसे लोन न चूका पाने के चलते गिरवी रखी है मैंने अपनी मोटरसाइकिल 

वे सुनते है और फिर मैं देखता हूँ कि धीरे धीरे उनका चेहरा मुलायम पड़ने लगता है | 

मैं चल पड़ता हूँ अपने रस्ते पर और कुछ दूर जा देखता हूँ कि उन्होंने भी बस्ती का रास्ता पकड़ लिया है | 
 

 


कि कैसे भरी 

 ढूंढ निकालता हूँ अच्छी सी हार , एक बेवफाई 

इतनी बड़ी कि 
कैसे मंदिर के कूड़ेदान से उठाया गया था मुझे | 

कैसे शादी के कार्ड छपने के बाद भाग गयी थी मेरी पहली और आखिरी मंगेतर 

देखता हूँ कि धीरे धीरे उनका चेहरा मुलायम पड़ने लगता है 

जा देखता हूँ कि उन्न्होंने भी बस्ती का रास्ता पकड़ लिया है 

शुक्रवार, 4 सितंबर 2026

मेरा भोला होना

मैं ठगा गया हूँ बार बार 

रिश्तों में , प्यार में , पैसे के लेनदेन में , व्यापार में | 

इसलिए नहीं कि दुनिया बुरी है | इसलिए क्योंकि आसान होता है भोले लोगों को ठगना | 

पर सीधे होने में , भोले होने में , पता है फायदा क्या है ? आप देख पाते हो होशियार लोगों के वे रंग , वे पहलु जो वे दूसरे होशियार लोगों को नहीं दिखा पाते | 

भोले लोगों को दुनिया के ज्यादा रंग दीख पड़ते है | और ज्यादा चटख | 

और इसलिए मैं चुनता हूँ भोला होना | 

ज्यादा देख पाता हूँ |  

बुधवार, 2 सितंबर 2026

नाकाम लड़के

 लड़के जो छूट जाते हैं , तरक्की की राह में , पीछे | 

रह जाते हैं गाँव में | 

ऐसे  'नाकाम ' लड़कों के सहारे ही चलते हैं , परिवारों के सारे काम |  

शनिवार, 29 अगस्त 2026

डरता हूँ मैं

 डरता हूँ मैं कई बार नौकरी छोड़ देने के विचार से 

तमाम थकान के बावजूद  | 

इस विचार से कि उस दुनिया में जहाँ हर वो आदमी जो काम पर नहीं है , नाकाम है ! 

उस दुनिया में कौन सा मुखौटा लेकर जाऊँगा | 

अगर मेरे पास बताने के लिए कोई काम नहीं होगा 

क्या तब भी ये दुनिया मुझे किसी काम का आदमी समझेगी ?  डरता हूँ मैं | 

प्यार के इकरार से


हर बार तुम तोड़े नहीं जाओगे, प्यार में किये गए इंकार से !

कई बार तोड़े जाओगे, प्यार के इकरार से | 

इकरार जो उस वक़्त आएगा ,जब न मौसम होगा, और ना ही हालात | 

तुम्हे हलाक कर जायेगा कोई, इस एहसास से कि काश तुमने कोई संजीदा कोशिश की होती | 

डरना तुम ऐसे इकरार से , और रोक देना उसे कहने से पहले ही , जो आये तुम्हारे पास ऐसे किसी मिज़ाज़ से | 

क्योकि प्यार में मिला इंकार मामूली सा एक तमाचा है | 

लेकिन गलत वक़्त का इकरार , देह में छूटा काँटा है ! 

असली कला

 वे कहते है कि लोगों को हँसाना एक कला है |  मैं कहता हूँ कि वे लोग जो हँसते है दुनिया के सामने  उन्हें अपने कंधे पर सर रखकर रो लेने देना असल...