शनिवार, 21 मार्च 2026

इंसान लड़ते ही रहेंगे

इंसान आपस में लड़ते ही रहेंगे | 
तब तक , जब तक तीन टांगी वाले एलियंस धरती पर नहीं आ जाते और इंसानो को एक साझा दुश्मन नहीं मिल जाता | 
जैसे प्रेम है , भूख है , लालच है , वैसे ही इंसान के वजूद में नफरत भी है | 

आदमी का एवोलुशन एक कबीलाई प्राणी के तौर पर हुआ है | और हर एक कबीले वालो को दूसरे कबीले वाले बतौर दुश्मन लाजिमी ही चाहिए | 
सो , सहूलियत के हिसाब से , कहीं हिन्दू  मुस्लिम के नाम पे, कही अरब यहूद के नाम पे , अमीर गरीब के नाम पे , काले गोर के नाम पे , कम्युनिस्ट कैपिटलिस्ट के नाम पे , इंसान लड़ते ही रहेंगे | 
लड़ते रहना ही इंसान के वजूद को पूरा करता है | 

मंगलवार, 24 फ़रवरी 2026

ऐब भी हुनर

ये दुनिया तुम्हारे ऐबो में भी हुनर ढूढ़ लेगी | वैसे ही जैसे एक अच्छे कवि की ख़राब कविता में लोग गूढ़ मायने तलाश लेते है | 

शर्त बस इतनी है कि तुम्हारा शुमार कामयाब लोगों में हो |  

गुरुवार, 19 फ़रवरी 2026

इत्ता सा सफर

गाँव के फार्म से शहर को निकला आदमी अपनी पूरी जवानी इस प्रयोजन में काट देता है कि वो बुढ़ापे में अपने फार्महाउस में आराम से रहेगा | 

यानि कि उसकी जिंदगी की तमाम भागदौड़ का हासिल फार्म से फार्महाउस तक का सफर ही है | 

विडंबना ये कि ये सफर भी विरले ही हासिल हो पाता है ! 

काम हमेशा रहेगा



ये जो दुनिया भाग भाग कर काम कर रही है 

काम को खत्म कर देना चाहती है 

क्या इसे नहीं पता 

काम कभी खत्म नहीं होता 

इंसान खत्म हो जाता है | 

काम शाश्वत होता है 

तुम्हारी व्यस्तताएँ फ़र्ज़ी हैं | तुम्हारे 'जरूरी' काम , दुनिया के लिए इतने जरूरी नहीं है, जितने तुम्हे लगते हैं | 


सोमवार, 16 फ़रवरी 2026

वह हीरो नहीं है

अपनी निजी जिंदगी खूंटी पे टाँगकर ऑफिस में दूसरों से ज्यादा और तय घंटों से देर तक काम करने वाला आदमी कोई हीरो नहीं होता | 

इसके बरक्स , ऐसा आदमी , अनजाने में ही अपने साथियों के लिए एक ऐसा बेंचमार्क खड़ा कर रहा होता है , जो असाध्य भी है और गैरजरूरी भी | 

और इसके बदले में वो खुद क्या पाता है ? परसेंट दो परसेंट ज्यादा सैलरी  , थोड़ा सा ज्यादा बोनस , जिससे वो पास के मॉल में जाकर या ऑनलाइन ही , गैरजरूरी सामान खरीदता है | खुद को पैंपर करने के नाम पर | 

यानी कि ये आदमी अपने कलीग्स के लिए तो नुकसानदायक होता ही है , ये ब्लाइंड consumerism की लालची मशीन में ईंधन झोंक धरती को भी नुक्सान पंहुचा रहा होता है | 


क्या आपके आस पास है कोई ऐसा आदमी ? 

शुक्रवार, 13 फ़रवरी 2026

ये ऊंचे औहदों पर बैठे लोग इतने क्रूर क्यों होते हैं

 "ये ऊंचे औहदों पर बैठे लोग इतने क्रूर क्यों होते हैं? इसलिए... क्योंकि तरक्की की सीढ़ी के पायदान लकड़ी के नहीं होते, ज़िंदा आदमियों के सिर के ऊपर पैर रखकर ऊपर चढ़ना होता है। शरीफ़ दिल का भोला आदमी या तो ऊपर चढ़ ही नहीं पाता, या भूले से चढ़ भी गया... तो वहां उसका कोई वक़ार, कोई रुतबा नहीं होता।"

गुरुवार, 12 फ़रवरी 2026

असली स्त्रियों के मूछें भी होती हैं |

सारी उम्र बाहरी रूप और रोमांच के पीछे भागने वाले पुरुष ये स्वीकार ही नहीं कर पाते कि असली स्त्रियों के मूछें भी होती हैं | 

और ये स्वीकार न कर पाना , उनके भीतर एक नासूर की तरह रिसता है | जिसके चलते वे एक चमक से दूसरी चमक , एक शरीर से दुसरे शरीर के पीछे भागते रहते है | पर सुकून कही भी नहीं आता | 

असलीप्रेम  असली लोगों से ही मिल सकता है , मोम के पुतलो से नहीं | 

इंसान लड़ते ही रहेंगे

इंसान आपस में लड़ते ही रहेंगे |  तब तक , जब तक तीन टांगी वाले एलियंस धरती पर नहीं आ जाते और इंसानो को एक साझा दुश्मन नहीं मिल जाता |  जैसे प्...