शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026

Trauma

 पता नहीं क्यों , मुझे घबराहट होती है अच्छे लोगो के साथ | लोग जो जेनुइनली अच्छे होते है | लोग जो बिना मतलब हाथ बढ़ा देते है मेरी मदद को | अजीब सी बैचनी होती है मुझे | 

लगता है की कुछ तो गड़बड़ है | कुछ ऐसा जो बस अब टूट जायेगा | 

और ये बार बार होता है मेरे साथ | मेरा मन होता है भाग जाने का ऐसे लोगो से दूर | या फिर मैं सूँघता रहता हूँ हर वक़्त जब तक वे मौजूद होते है कि कुछ तो ऐसा सुराग मिले जिससे मुझे पता चले कि क्या चाल है इस आदमी की | 


पूरे वक़्त जब वे बतला रहे होते है मुझसे मैं गौर से देख रहा होता हूँ उनकी आँखे कि दिख जाए कोई सुअर का बाल | 

जिससे पता चले कि हाँ ये आदमी आदमजात ही है | 


कभी कभार कोई दोस्त फ़ोन कर देता है मुझे और कोई भी मतलब जाहिर नहीं करता तो बैचेन हो जाता हूँ मैं | 

क्या पेसिमिस्टिक हूँ मैं और ये दुनिया अच्छी ही है हमेशा से | 

तो बताओ मुझे इतने जख्म क्यों है मेरी पीठ पर | 


क्यों लूटा गया है मुझे बार बार , उन्ही के द्वारा जो हमराह रहे मेरे | 

क्यों छोड़ा गया मुझे अपनाकर | क्यों बिठाया गया मुझे पलकों पर और फिर फेंक दिया  ये कहकर कि मैं कुछ भी डिज़र्व नहीं करता | 

और कितनी बार कितने हो लोगो के द्वारा हुआ ये सुलुक मेरे साथ कि नकली लगते है मुझे अच्छे लोग | 

तुम कभी मिलो न मुझसे तो मत कहना कि लोग अच्छे होते है और अच्छे लोगो को अच्छे लोग मिलते है | 

क्योकि मैं फट पडूंगा और तुम्हे भी अच्छा नहीं लगेगा | 


कि मिले मुझे कोई ऐसा सुराग कुछ तो आँखों में मुझे परेशां  से  ही 

गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026

कुछ तो ऑफ है

 मेरे घर पर आजकल पुताई का काम चल रहा है | चूँकि मैं छुट्टी में हूँ और पुताई , चिनाई ,खुदाई जैसे कामो को होते देखना मेरा बचपन से ही शगल रहा है | मैं सुबह की नरम धुप में बैठे नाखून कुतरते हुए पुताई होते देख रहा हूँ | 

पुतैया का लड़का मेरे लड़के से बमुश्किल साल दो साल बड़ा ही होगा | मसें अभी ढंग से काली भी नहीं हुई हैं | उसके हाथ सीढ़ी पर चढ़े उसके बाप से भी तेज़ चलते हैं | उसने दुमंजिले की पुताई से पहले छज्जे पर लगे शीशे के पैनल बड़ी ही सफाई से उतार एक तरफ रख दिए है | और कूची से छज्जे की छत में बने फूल में बारीकी से रंग भर रहा है | 

कल मैं पुतैय्या के साथ रंगो का चुनाव कर रहा था तो उसका लड़का हमारे पास आया और सलाह दी कि पट्टी में मरून के साथ चारकोल का शेड ले लो | और छत को बीज में रहने दो |  जब हम गली में खड़े ये सब बातें कर रहे थे  तो मैं घर के अंदर से आते हुए शोर को सुन रहा था | मेरा लड़का आज फिर अपनी मम्मी से लड़ रहा है कि उसे चाय के साथ पराठान हीं ओरयो बिस्कुट ही खाना है | पुट्ठी की खाली बाल्टी को रास्ते से दुमंजिले पर उठाने के लिए पुतैय्या के लड़के ने उससे मदद मांगी थी पर मेरा लड़का एक सीधी गाँठ ना लगा सका , जिससे बाल्टी खिंच जाए | 

हाँ , एक्स्ट्राकरिकुलर क्लासेस होती हैं उसकी स्कूल में | जिसमे क्ले आर्ट सिखाई जाती है | फ्लूट की क्लास भी लेता है | पर क्या ही सिखाया जाता है स्कूल की एक्स्ट्रा करिक्युलर्स में ! 

क्या उसमे कुछ भी रियल वर्ल्ड स्किल होती है | 

हालाँकि मेरा कोई इरादा नहीं है कि मेरा लड़का पुतैया बने , पर हमउम्र लड़कों में स्किल्स का इतना बड़ा गैप देखकर परेशां जरूर हूँ | 

और मैं सोच रहा हूँ कि कही ये स्कूल की पढाई और हमारी परवरिश एक और मेरे जैसा कागजी शेर तो पैदा नहीं कर रही जो सिर्फ और सिर्फ नौकरी में ही कुछ असरदार हो सकता है और उसी पर निर्भर होगा | 

समाज के एक बड़े हिस्से की नयी नस्ल सिर्फ और सिर्फ नौकरी के लिए तैयार हो रही है जिन्हे स्कूली पढाई के बाहर कुछ भी तो नहीं आता |  रहेगा जिसे 


हम 50 -60 हज़ार की नौकरी के लिए समय और सामर्थ झोंक रहे है  है जबकि सच्चाई ये है कि हमारे आसपास ही काम करते कितने ही ऐसे कारीगर , कार्पेटर , इंटीरियर का छोटा काम करने वाले , वेल्डर , फैब्रीकेटर दिख जायेंगे जो लाख सवा लाख आराम से कमा रहे हैं | मैं पढाई को , नौकरी को छोटा नहीं बता रहा पर कुछ तो है पर परवरिश में , स्कूल की पढाई में कुछ तो ऑफ है     


    

बुधवार, 21 अक्टूबर 2026

आपके पास कोई मजबूत कहानी जरूर होनी चाहिए

 दुनिया को कोई दिलचस्पी नहीं है आप में , पर क्या ही करे बेचारी | इसकी ख़ुशी की जो पगडण्डी है उसकी सजावट में कुछ टाइल्स लगनी होती हैं | आपके दुखो की टाइल्स | 

लेकिन आप बच सकते है इन दुखो से | एहसासो से जो लोग आपमें घोपने चाहते है | 


हमने अपनी समूची जवानी के एवज में एक मकान  लिया है शहर में | जवानी क्या बुढ़ापा तक गिरवी रखा है बैंक में | 

अब ये कोई आलिशान मकान तो है नहीं जिसे हम फ्लेक्स कर सकें | ये एक बिना सीखचों का दो मंजिला मकान है जो एक गली  में है |  गली तंग तो नहीं है पर कतार में गाड़ियां लगने के बाद इतनी जगह नहीं बचती कि आप गली में खड़े होके हमारी दुमंजिली में लगे नजरौटे को देख सकें | 

मैं तो शर्मा रहा था नजरौटा लगाने में पर बीवी ने कहा कि नज़र लगने से अच्छा है नजरौटा | क्योंकि नज़र लगने से अच्छा है नजरोटा | क्योंकि नज़र ऐसी भी होती है कि पत्थर को भी फोड़ देती है | 

अब आदमी का मन होता है कि थोड़ी पीठ थपथपा ले अपनी खुद की | 

पर लोग पूछते है कि कितने गज़ में है १०० गज ! हमारे बिट्टू भईया का तो 500 गज़ में है वसंतकुंज में ! 


लोकेशन क्या है | ओहो थोड़ी ऑफ लोकेशन है | 

महंगा पड़ गया , इतने में तो स्मार्ट सिटी में हो जाता | अरे खम्बा आ गया उत्तर पूर्व में , वास्तु गड़बड़ हो गया | 

मैं कान के पर्दो पर ही रोक देता हूँ ये संवाद | 

और कहता हूँ कि अरे ये तो ऐसे ही ले लिया बच्चो का स्कूल पास में है | 


असल में हम फार्म हाउस डेवेलोप कर रहे हम अपने गांव में  | उसमे अमलतास के दो पेड़ है | उस पर हम ट्री हाउस बना रहे | पूरा हो जायेगा तो मंटो , प्रेमचंद , एंटोन  चेखोव की किताबे सजेंगी वहाँ | बढ़िया कालीन बिछेगी | और ट्री हाउस के ठीक बगल में हम एक पोंड  बना रहे है | ट्री हाउस की खिड़की से कांटा दाल मछली पकड़ा करेंगे | मेहदी हसन की ग़ज़ल चला करेंगी | वहां बैठ के चाय चला करेगी | अरे ये तो ऐसे हिले लिया टाइम पास | 


और मैं ये सब इतने कन्विक्शन के साथ कहता हूँ कि उदास हो जाते है कुछ लोग |  

आपके पास कोई मजबूत कहानी जरूर होनी चाहिए नहीं तो अपनी कहानी से मार डालनेगे तुम्हे दुनिया वाले | 

 दुनिया को कोई दिलचस्पी नहीं है आप में , पर क्या ही करे बेचारी | इसकी ख़ुशी की जो पगडण्डी है उसकी सजावट में कुछ टाइल्स लगनी होती हैं | आपके दुखो की टाइल्स | 



शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026

कोई भी बात

तुम समझा सकते हो दुनिया को , लेकिन समझा नहीं पाओगे किसी अपने को ही , कोई भी बात !

तुम समझाओ दुनिया को कि तुम अपनाते हो 50-30 -20  का रूल जब बात पैसे की आती हो | 

और तुमने पढ़ रखी है मॉर्गन हौसल की साइकोलॉजी ऑफ मनी | 

लेकिन तुम्हारी बीवी हमेशा मानेगी कि बहुत जरूरी है कि तुम पर रखी जाए कड़ी नज़र जब बात पैसे की आती हो क्योंकि तुम लुटा दोगे सब , बाँट डोज सब जो कड़ी नज़र न रखी जाए | 


तुम बतलाओ दुनिया को कि जीवन जो है क्षणभंगुर है , इस पल है अगले पल नहीं | 

और दुनिया मानेगी कि बात जो तुमने कही है , सही है | 

पर तुम समझा नहीं सकोगे अपने ही माँ बाप को जो 70 की उमर में भी ऐसे लड़ते हो आपस में जैसे अभी अभी बिहाया है कोई नवयुगल , नवयुगल जिसका ईगो टकराता हो | 

तुम लिखो जवानी पर कोई कविता |  कि कैसे जवानी नायाब तोहफा है कुदरत का जिसे जिया जाए , पिया जाए ऐसे जैसे अमृतधारा हो | दुनिया मानेगी | 

लेकिन नकार देगा तुम्हारा विचार कोई तुम्हारा ही 

जो लड़ रहा है सालों से मुकदमा इस हुनक में कि जीवन मेरा जाए तो जाए , घसीटूंगा इसे लम्बा | ना खुद आगे बढ़ू न इसे बढ़ने दूँ | 


तुम कहो कि तुम मानते हो कि  शरीर आत्मा का मंदिर है और मंदिर है तो रखो इसे पाक साफ़ और दुनिया कहेगी कि बात तो सही है | 

लेकिन कोई  तुम्हारा अपना ही जो होगा लती किसी व्यसन का , पीता हो या फूंकता हो कुछ | वो मुँह पे ही कह देगा तुम्हारे | 

कि चार पैसे ज्यादा कमा लेते हो इसका मतलब कि ज्यादा जानते हो | और तुम रह जाओगे अवाक् | 


 तुम समझा सकते हो दुनिया को लेकिन समझा नहीं पाओगे किसी अपने को ही , कोई भी बात !



आपस में , 

नवयुगल जिसका ईगो टकराता हो |


पीया जाए 


तलाक़ का मुकदमा , इस हुनक में , कि जीवन मेरा जाए तो जाए 

शरीर आत्मा का मंदिर है 

बात 

 किसी व्यसन का या फुख्ता हो 

चार पैसे ज्यादा कमा 

तुम समझा सकते हो दुनिया को लेकिन समझा नहीं सकोगे कोई भी बात 


अच्छा जी

 नई टाउनशिप आ गयी है यहाँ भैय्या |  प्लॉटिंग चल रही | 

"अच्छा जी "

तगड़ा मुआवजा मिला है इन गाँवों में | 

"अच्छा जी"

किया हुआ मुआवजे का ?

इन्वेस्टमेंट , शहर में प्लाट ले लिए | अपार्टमेंट ले लिए | 

अच्छा जी 

मतलब  गांव की जमीन बेच कर शहर में प्लाट ले लिए ?

हाँ , ग्रोथ ज्यादा है 

फिर धरा भी क्या है खेता  में ? 

खाएंगे क्या ? प्लाट ?

प्लाट क्यों , नौकरी 

क्या बनेंगे , आर्किटेक्ट ?

नहीं 

फिर ?

करेंगे तो गार्ड की नौकरी करेंगे अपनी ही जमीन पे बानी प्रॉपर्टी पर 

अच्छा जी !

अब अच्छा जी कहने से कोई रोक थोड़े न पॉयेगा भईया ?

दिल्ली के चौगरदे 150 किलीमीटर तक छोटा किसान ख़तम हो जायेगा अगले १० साल में 

१० साल नहीं लगेंगे , हाईवे पे बसे गांवों का खसरा अभी देखो उठा के | बेच चुके है सब | सब जमीन गयी | 

मतलब गांव में रह रहे और गांव की ही जमीन बेच दी ?

हाँ जी ,"

मतलब गांव खाएंगे  अब शहर में पैक हुआ आश्रीवाद का आटा 

हाँ सत्य है ये 

अच्छा जी !

गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026

जुआरी आदमी

अगर तुम देखना चाहते हो कोई जुआरी आदमी तो तुम मत जाना देखने पुराने लाटरी के अड्डे | 
क्योकि सरकार ने बंद कर दीं हैं लॉटरियाँ   | 
और खोल दिए है उनकी जगह अंग्रेजी शराब की दुकानें | 

तुम जाना शहर के महंगे स्कूलों के गेट की सड़क पर जहाँ चमकीली गाड़ियों से उतर रहें हो अमीर लोगों के बच्चे | 
वहाँ देखना तुम फुटपाथ से सटा पुरानी स्कूटी लिए खड़ा होगा कोई बाप | स्कूटी जिसकी आसान क़िस्त अभी भी जारी होगी  | 
बाप जो अपनी औकात से कहीं ज्यादा बड़ा दाँव खेल रहा है अपने बच्चों पर | 
अगर इस जुआरी बाप का दाँव सही पड़ गया तो वो कल होगा कामयाब बच्चों का होशियार पिता  | 

और अगर गलत पड़ा दाँव, तो शून्य में ताकते कटेगा उसका बुढ़ापा | 
और वो मर जायेगा बेवक़्त किसी ऐसी बीमारी से जो कोई गंभीर बीमारी भी न होगी | 

हिंदुस्तान में बच्चों की पढाई पर खेला जाने वाला जुआ दुनिया का सबसे बड़ा जुआ है | 
इसके कद का जुआ दुनिया के किसी कोने में नहीं है ! 

मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026

दर्शनीय

यूँ ही चलते फिरते 

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 और फिर उम्र के साथ सीखना होता है आपको ये हुनर भी कि आप देख तो ले उन दृश्यों को जो दर्शनीय हैं पर देखे कुछ इस हिसाब से कि कोई देख न पाए कि आप भी देखते है !

Trauma

 पता नहीं क्यों , मुझे घबराहट होती है अच्छे लोगो के साथ | लोग जो जेनुइनली अच्छे होते है | लोग जो बिना मतलब हाथ बढ़ा देते है मेरी मदद को | अजी...