जमाना लग गया | स्त्रियों को सलवार के साथ स्पोर्ट्स शूज पहन कर काम पर जाने में |
क्योंकि उसे विरासत में सलवार ही मिली है | स्पोर्ट्स शूज उसने पुरुषों के वर्चस्व वाले दंगल में
अपना कौशल दिखा कर जीते है |
Simple and short Hindi stories from day to day life
जमाना लग गया | स्त्रियों को सलवार के साथ स्पोर्ट्स शूज पहन कर काम पर जाने में |
क्योंकि उसे विरासत में सलवार ही मिली है | स्पोर्ट्स शूज उसने पुरुषों के वर्चस्व वाले दंगल में
अपना कौशल दिखा कर जीते है |
रिश्ते में प्रेम कहाँ टिकता है ? केवल वहाँ , जहाँ दोनों को लगता हो कि मुझे मेरी औकात से ज्यादा मिला है |
कहीं और ऐसा ना मिल पाता |
बाकि की सारी दुनिया अपने रिश्ते सीजफायर मोड जी रही है | दबे ढके , इधर उधर से समर्थन की जुगत में लगी ही रहती है |
रोना छोड़ दोगे अपने रिश्ते के अधूरेपन का , जिस दिन जान लोगे कि सोशल मीडिया पे 'माय वाइफ , माय लाइफ ' , 'बेस्ट हबी इन दी वर्ल्ड ' के स्टेटस लगाने वाले भी अपने रिश्तों से खुश नहीं हैं !
ये दुनिया तुम्हारे ऐबो में भी हुनर ढूढ़ लेगी | वैसे ही जैसे एक अच्छे कवि की ख़राब कविता में लोग गूढ़ मायने तलाश लेते है |
शर्त बस इतनी है कि तुम्हारा शुमार कामयाब लोगों में हो |
गाँव के फार्म से शहर को निकला आदमी अपनी पूरी जवानी इस प्रयोजन में काट देता है कि वो बुढ़ापे में अपने फार्महाउस में आराम से रहेगा |
यानि कि उसकी जिंदगी की तमाम भागदौड़ का हासिल फार्म से फार्महाउस तक का सफर ही है |
विडंबना ये कि ये सफर भी विरले ही हासिल हो पाता है !
ये जो दुनिया भाग भाग कर काम कर रही है
काम को खत्म कर देना चाहती है
क्या इसे नहीं पता
काम कभी खत्म नहीं होता
इंसान खत्म हो जाता है |
काम शाश्वत होता है
तुम्हारी व्यस्तताएँ फ़र्ज़ी हैं | तुम्हारे 'जरूरी' काम , दुनिया के लिए इतने जरूरी नहीं है, जितने तुम्हे लगते हैं |
अपनी निजी जिंदगी खूंटी पे टाँगकर ऑफिस में दूसरों से ज्यादा और तय घंटों से देर तक काम करने वाला आदमी कोई हीरो नहीं होता |
इसके बरक्स , ऐसा आदमी , अनजाने में ही अपने साथियों के लिए एक ऐसा बेंचमार्क खड़ा कर रहा होता है , जो असाध्य भी है और गैरजरूरी भी |
और इसके बदले में वो खुद क्या पाता है ? परसेंट दो परसेंट ज्यादा सैलरी , थोड़ा सा ज्यादा बोनस , जिससे वो पास के मॉल में जाकर या ऑनलाइन ही , गैरजरूरी सामान खरीदता है | खुद को पैंपर करने के नाम पर |
यानी कि ये आदमी अपने कलीग्स के लिए तो नुकसानदायक होता ही है , ये ब्लाइंड consumerism की लालची मशीन में ईंधन झोंक धरती को भी नुक्सान पंहुचा रहा होता है |
क्या आपके आस पास है कोई ऐसा आदमी ?
जमाना लग गया | स्त्रियों को सलवार के साथ स्पोर्ट्स शूज पहन कर काम पर जाने में | क्योंकि उसे विरासत में सलवार ही मिली है | स्पोर्ट्स शूज उसन...