ये जो बुआ है न , गंगा पार वाली ये बेकार हैं ! ये एक किलो मीठा लाती है और इनका बस चले तो पूरा घर भर के ले जाएँ हमारा ट्रक में !
ये जो चाचा चाची है ये भी बेकार है , कोई दुःख नहीं है इनके जीवन में , इनका रोना सिर्फ इसलिए चालु रहता है कि निकाल लें हम से कुछ |
दादा दादी भी बेकार हैं | इनकी मति ऐसी मारी गयी है कि कही हमारे हिस्से में जो थोड़ी बहुत जमीन है ये भी न लिखा डालें अपनी दूसरी औलादों के नाम |
कजिन भी ठीक नहीं हैं तुम्हारे | ये तुमसे बात ही इसलिए करते हैं कि या तो फोन मंगा लें या फिर कोई गैज़ेट मंगा ले तुम से मुफ्त में |
सब के सब बेकार है |
और जब ये सब के सब बेकार हैं फलित होता है तुम्हारे जीवन में , तो तुम ही फेक दिए जाते हो वृद्धा आश्रम में अपनी ही औलाद के द्वारा |
जहाँ तुम मीडिया का चारा बनते हो , जो रुलवाता है तुम्हे कैमरे पर और तुम कहते हो पढ़ाया , लिखाया , पैरो पे खड़ा किया , मेरे तो बच्चे ही बेकार हैं !
जब सब ही बेकार हैं तो तुम भी अच्छे क्योंकर माने जा सकोगे | सोचो !