मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026

दर्शनीय

यूँ ही चलते फिरते 

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 और फिर उम्र के साथ सीखना होता है आपको ये हुनर भी कि आप देख तो ले उन दृश्यों को जो दर्शनीय हैं पर देखे कुछ इस हिसाब से कि कोई देख न पाए कि आप भी देखते है !

शनिवार, 10 अक्टूबर 2026

जालिम हूँ मैं !

 जालिम हूँ मैं !

मार देता हूँ अपनी खुशियाँ कुछ ऐसे भी | 

गुजरता हूँ अकेले कई बार , खूबसूरत नज़ारो से | 

होना चाहता हूँ खुश | 

और फिर सोच देता हूँ कि कोई होता साथ , जो देखता मुझे खुश होते हुए !

कोई गुनाह है क्या , औसत होना

कोई गुनाह है क्या , औसत होना 

दोयम होना किताबो में , खेलों में 

नहीं तो !

तो फिर गुनाह है क्या ,

एक इज्जत की नौकरी का हक़दार होना ?

नहीं बुनियादी हक़ है ये तो !


तो गुनाह होगा एक जवान आदमी का , 

पड जाना प्रेम में , उम्र के गुलाबी सालों में !

नहीं , कुदरती है ये भी !


तो फिर स्वार्थी होगा वो आदमी 

जो कहता है कि जीवन उसका छोटा है और जीना चाहता है वो अपनी शर्तो पर 

नहीं , जीवन तो उसका है | 

तो फिर ?

गुनाह ये है कि ये आदमी भीड़ में पैदा हुआ है !

जहाँ आदमी सब कुछ है  गाजर , मूली , कद्दू , आवारा , नाकारा | 

बस , आदमी नहीं है ! 


मेरे जंगल का आदमी, आदमी क्यों नहीं है ?

बुधवार, 7 अक्टूबर 2026

गरीबी का खौफ

 तुम तोड़ तो दोगे गरीबी का चक्र , अपनी मेहनत से | 

लेकिन तुम नहीं तोड़ पाओगे उसका खौफ ! 

खौफ, जो दो पीढ़ियों तक चलता है | 


जब भी तुम कहोगे कि तुम लौट जाना चाहते हो | 

तो तुम्हारे अपने ही कहेंगे तुमसे , कि लौट तो आओ ,पर वापस आकर करोगे क्या ?

और उनके चेहरों की फ़िक्र मजबूर करेगी तुम्हे कि तुम बदस्तूर जारी रहो अपने हालातो में | 

क्योंकि  हालात तुम्हारे जो भी हों , इन्ही हालातों की वजह से घर के हालात बदले हैं | 

तुम तोड़ तो दोगे गरीबी का चक्र , अपनी मेहनत से | 

लेकिन तोड़ नहीं पाओगे उसका खौफ | 



सोमवार, 5 अक्टूबर 2026

अभाव

झूठमूठ का ही सही , कुछ अभाव जरूर रखना अपने बच्चों के जीवन में | 
वरना , वे टिक नहीं पाएंगे उनके सामने , जो पहुंचेंगे उन तक अभावों का दरिया पार कर | 

          

शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2026

राब्ते

वे कहते है कि तुम अब बदल गए हो , 
पहले जैसे नहीं रहे | तो मैं नहीं कहता कि तुम कौन सा पहले जैसे हो | 
मैं सिर्फ हम्म कहता हूँ | 
वे कहते है कि मैं फ़ोन नहीं करता तो मैं नहीं कहता कि वे कौन सा करते है | 
मैं सिर्फ माफ़ी मांग लेता हूँ | 

फिर मैं राय लेता हूँ उनकी उन मुद्दों पर जिन पर मुझे कोई खास राय नहीं चाहिए !
और मैं सुनिश्चित करता हूँ कि 
वे जब मुझसे बतियाये तो एक दो इंच ऊँचे होकर ही जाए 
और कुछ इस तरह बचा रखे है मैंने राब्ते लोगो से !
वर्ना मैं निपट अकेला ही हूँ | 


बुधवार, 30 सितंबर 2026

ऊब


मैंने समझाया उसे कि मत देखा करो ये रील्स !

मेरे लिए , अपने लिए , अपने रिश्ते के लिए !

क्योकि खौफ है मुझे कि एक दिन तुम ऊब जाओगी मुझसे 

और ये रील्स की आदत , सहने ना देगी तुम्हे ऊब  | 


बैठी रहा करो कभी मेरे पास उबासियाँ लेते हुए 

तब भी जब कि मेरा हाथ ठंडा हो या खुश्क हो | 

 वो यूँ के खरसाह जरूरी है , पहले बारिश के तभी फुलबारी सजती है | 

रोज रोज बारिश होने में केवल घास ही उगती है | 

दीर्घायु भव: 


बहुत जरूरी है ऊब के बाबजूद बने रहना रिश्ते में , बदकिस्मती से इंसान की ऊब बर्दाश्त करने की कूबत कम हो रही है | 


दर्शनीय

यूँ ही चलते फिरते  *************  और फिर उम्र के साथ सीखना होता है आपको ये हुनर भी कि आप देख तो ले उन दृश्यों को जो दर्शनीय हैं पर देखे कुछ ...