शनिवार, 18 अगस्त 2018

भरपाई की कोशिश


अरसे बाद ऐसा हुआ था कि छुटकी ,  बड़े राजकुमार से पहले सो गयी थी |
साहब मेरी  बगल में लेटे सोने की तैयारी में थे | 
लगा , ग़लतफहमी दूर करने का सही वक़्त है , लिहाजा  मेरी तरफ से कोशिश हुई !
बालों में हाथ फिराया  और जितना दुलार उड़ेल सकता था , सब उड़ेल कर  बोला " बेटा ध्रुव , भूमि छोटी है ना , अभी नासमझ है , इसीलिए हम  उस पर ज्यादा ध्यान देते है | 
ऐसा मत सोचा करो यार , कि पापा  तुम्हे कम प्यार करते है !"

 लगा , थोड़ा मक्खन लगा दिया जाए ! अति उत्साह में ये भी बोल बैठा  " देखो बेटा , सच तो  ये है कि पापा  तुम्हे 'भूमि ' की तुलना में  ज्यादा प्यार करते है !"

तपाक से जबाब मिला " पापा , मैं आपका बेटा हूँ ना और भूमि आपकी बेटी "
"हाँ , सही बात "
"फिर आपको  दोनों को बराबर प्यार करना चईये , किसी को  भी कम नइ "

स्तब्ध ! मुँह से हम्म्म ही निकला | 

खैर , बातचीत आगे बढ़ी तो साहब ने मोबाइल स्क्रीन से नजर हटा कर फ़रमाया " पापा आप मेरे लिए ऐसा रोबोट बना सकते हो??
मैं कुछ जबाब सोचता , उससे पहले ही रसोई से बैकअप आ गया " पापा  उस तरह के इंजीनियर नहीं है बेटा "

"अच्छा , लेकिन इन्होने प्रॉमिस किया था कि नया मोबाइल गेम खुद से बना  देंगे , जिसमें मैं हीरो होऊंगा ,वो भी तो नहीं बनाया !"
 फिर मेरी तरफ निगाह किये बिना , मोबाइल में ताकते ताकते ही "आप किस तरह के इंजिनीयर हैं , पापा ?"

हम खुली छत पर लेटे थे, अचानक से मुझे आसमान में खिले तारे बड़े प्यारे से लगने लगे , बड़े अरसे बाद देख रहा था !
तारों की पहली  परत को चीर मेरी नजर दूसरी परत पर पहुँच गयी ,  छटा सम्मोहित करने वाली थी , पर फिर भी मन में विचार आ ही गया " आखिर , मैं हूँ किस तरह का इंजिनीयर | अगर इंजिनीयर नहीं तो और क्या "

अचानक से नींद मुझ पर हावी हो रही थी और मैं बिना वक़्त ही नींद के आगोश में उतर रहा था !

                                                                                                    सचिन कुमार गुर्जर 
                                                                                                     18-Aug- 2018


फ्लोरल मास्क

पता नहीं ये अनुशासन कब तक कायम रहेगा पर आजकल मेरा रूटीन ये है कि जरूरी,  गैर जरूरी, पसंद ना पसंद , हर तरह के काम निपटाते हुए मैं शाम के साढ़े...