बुधवार, 16 सितंबर 2026
टाइमपास
बुधवार, 9 सितंबर 2026
मेरी पोटली
शुक्रवार, 4 सितंबर 2026
मेरा भोला होना
मैं ठगा गया हूँ बार बार
रिश्तों में , प्यार में , पैसे के लेनदेन में , व्यापार में |
इसलिए नहीं कि दुनिया बुरी है | इसलिए क्योंकि आसान होता है भोले लोगों को ठगना |
पर सीधे होने में , भोले होने में , पता है फायदा क्या है ? आप देख पाते हो होशियार लोगों के वे रंग , वे पहलु जो वे दूसरे होशियार लोगों को नहीं दिखा पाते |
भोले लोगों को दुनिया के ज्यादा रंग दीख पड़ते है | और ज्यादा चटख |
और इसलिए मैं चुनता हूँ भोला होना |
ज्यादा देख पाता हूँ |
बुधवार, 2 सितंबर 2026
नाकाम लड़के
लड़के जो छूट जाते हैं , तरक्की की राह में , पीछे |
रह जाते हैं गाँव में |
ऐसे 'नाकाम ' लड़कों के सहारे ही चलते हैं , परिवारों के सारे काम |
शनिवार, 29 अगस्त 2026
डरता हूँ मैं
डरता हूँ मैं कई बार नौकरी छोड़ देने के विचार से
तमाम थकान के बावजूद |
इस विचार से कि उस दुनिया में जहाँ हर वो आदमी जो काम पर नहीं है , नाकाम है !
उस दुनिया में कौन सा मुखौटा लेकर जाऊँगा |
अगर मेरे पास बताने के लिए कोई काम नहीं होगा
क्या तब भी ये दुनिया मुझे किसी काम का आदमी समझेगी ? डरता हूँ मैं |
प्यार के इकरार से
हर बार तुम तोड़े नहीं जाओगे, प्यार में किये गए इंकार से !
कई बार तोड़े जाओगे, प्यार के इकरार से |
इकरार जो उस वक़्त आएगा ,जब न मौसम होगा, और ना ही हालात |
तुम्हे हलाक कर जायेगा कोई, इस एहसास से कि काश तुमने कोई संजीदा कोशिश की होती |
डरना तुम ऐसे इकरार से , और रोक देना उसे कहने से पहले ही , जो आये तुम्हारे पास ऐसे किसी मिज़ाज़ से |
क्योकि प्यार में मिला इंकार मामूली सा एक तमाचा है |
लेकिन गलत वक़्त का इकरार , देह में छूटा काँटा है !
गुरुवार, 27 अगस्त 2026
कभी कभी
कभी कभी
ऐसा किया कीजिये कि हो जाया कीजिये गायब उन जगहों से जहाँ तुम्हारी मौजूदगी को गैर जरूरी समझा जाता हो |
लोगो को थोड़ा चखने दीजिये, अपनी गैर मौजूदगी |
कभी कभी बिना किसी प्लान के उठाया कीजिये झोला, डाला कीजिये कोई किताब और जा बैठिये, कहीं भी |
किसी पार्क में , कही बहते पानी के किनारे |
देखिये कि कैसे कुदरत में कितनी ही गैर जरूरी चीजे है!
गिलहरी पेड़ पर चढ़ उतर रही है , खामखा |
चीटियाँ कतारों में भागी जा रही है | बिलाबजह | जैसे जंग पे जाती हों |
छोटे छोटे बीटल्स फ़ालतू का कूड़ा कचरा धकेले ले जा रहे है | अपने बिलों में |
एहसास कीजिये
कि कैसे इन तमाम गैरजरूरी चीजों के जक्सटापोसिशन से ही दुनिया खूबसूरत बन पड़ी है |
सिंक होने दीजिये इस थॉट को कि कुदरत में कुछ भी ऐसा नहीं है, जो फ़ालतू है |
और फिर जाने दीजिये उन लोगों को जिन्हे लगता है कि तुम किसी काम के नहीं हो |
घर की चारदीवारी
क्यों गिनी जाती हैं सारी बंदिशे औरतो के नाम
और सारी आजादियाँ मर्दो के नाम
क्यों माना जाता है घर की चारदीवारी को उम्रकैद
जबकि मैं अपने आस पास न जाने कितने ही ऐसे मर्दों को देखता हूँ जो खर्च हो रहे है
घर से बाहर ही , इस जतन में कि जुट जाए इतना भर कि जवानी में न सही बुढ़ापे में ही मयस्सर हो जाए घर की चारदीवारी |
शुक्रवार, 21 अगस्त 2026
सब नसीबों की बात है
सुनो , कभी कोसना मत किस्मत को , कि कब तक पापड़ बिलबायेगी |
कब तक आजमाएगी |
क्योकि इसी आजमाईश के बीच, इन्ही तनहा सफ़रों में कई बार किस्मत तुम्हारे सामने ऐसे शानदार नज़ारे खोलेगी कि देखने वाले कहेंगे कि सब नसीबों की बात है |
गुरुवार, 20 अगस्त 2026
ये विलायती शहर इतने सुन्दर क्यों होते है ?
जानते हो ये विलायती शहर इतने सुन्दर क्यों होते है ?
क्योकि ये जवानियों पर फलते फूलते हैं |
इन नौकाओं में आती जवानियों पर |
जवानियाँ जो आती है दूरदराज के गाँवों से |
मेरे इलाके के गाँव से |
फिर वे सींचती है इन शहरों को , भरती हैं इनकी रगो में अपना खून |
और जब ये शहर उन जवानियों को निचोड़ चुके होते है , तब उनके बचे खुचे मलबे को वापस भेज देते है |
इन्ही नौकाओं में | उन्ही गावों में जहाँ से वे आये थे |
बुधवार, 19 अगस्त 2026
मामूली बातें
ट्रैन पटरी पर चल रही है , सही समय पर |
एस्कलेटर इंसानो को पाताल में बने स्टेशनो से जमीन की सतह तक ले जा रहे है |
ट्रैफिक लाइटें जल रही है और ट्रैफिक स्मूथ है |
आदमी काम पर जा रहा है |
कैसी रोजमर्रा की बातें हैं | मामूली हैं |
मामूली चीज़े मामूली होती हैं तब तक जब तक वे हो रही होती है | उनका रुक जाना गंभीर होता है |
शनिवार, 15 अगस्त 2026
उत्सव
जानती हो ये उत्सव , ये त्यौहार हमे अच्छे क्यों लगते हैं ?
शायद इसलिए क्योकि ये रोज रोज नहीं आते | दुर्लभ है , लघु हैं |
रोज रोज कहाँ टांगी जाती है ऐसी रंगीन कंदीले |
और ये सोचकर मैं सुकून पाता हूँ कि शायद तुम अब भी उत्सव सा मानती होंगी अपने मिलन का
जो उत्सव की ही तरह लघु था , दुर्लभ था |
असहज
असहज
यूँ ही गाहे बेगाहे , घूमते फिरते देखता हूँ मैं |
कि कई बार , हाँ कई बार , मालकिनों से कही ज्यादा सुन्दर होती है उनकी काम वाली बाईयाँ |
सब्जी का झोला उठाये , या स्ट्रोलर में बच्चा लिए वे लगती हैं असली मालकिन , और मालकिन लगती हैं बाईयाँ |
और फिर सोचता हूँ मैं , वे मालकिनें कैसे जीत पाती होंगी उस असहजता पर , जो यदा कदा उनके मन में उठती तो होगी |
कैसे लाँगती होंगी औरत के उस आदिम डर को , कैसे पाटती होंगी स्त्रीमन के मूल में दबी उस ईर्ष्या को जो धधक सकती है महज पड़ोसन के लम्बे बालों से | और वे पति जो पति होने से पहले मर्द हैं , पाषाण की गुफाओं से उगे मरद | मरद जो घोड़े की गर्दनों पे खींच लाते रहे रास्ते में पसंद आयी सुंदरियाँ कैसे जीतते होंगे वे मरद आपने पाषाण पर |
सोचता हूँ मैं , कैसे सुविधा के लिए असजहता को जीत पाते होंगे वे परिवार जहाँ मालकिनों से कही ज्यादा सुन्दर होती है उनकी काम वाली बाईयाँ !
गुरुवार, 13 अगस्त 2026
ये जो अपने होते है न अपने
अच्छी खासी पढ़ती लड़की |
सपने ऊँचे गढ़ती लड़की |
फ़िक्र करेंगे कि माहौल बुरा है
और पढाई छुड़ा देते है |
ये जो अपने होते है न अपने , ये अपनेपन से ही ढ़हा देते है |
ऊँचा घर है माल मिलेगा , फिर न ऐसा ताल मिलेगा |
गुस्सा हों जो बात न मानी , दुनिया मूरख , बस ये ज्ञानी |
फिर प्रलोभन में बिहा देते है |
ये जो अपने होते है न अपने , ये अपनेपन से ही ढ़हा देते है |
फ़िक्र इन्हे है बड़ी तुम्हारी , जीवन कैसे चला सकोगे
आता क्या है किसके बूते , चार चवन्नी कमा सकोगे |
भोंदू , लल्लू , पप्पू कहकर
मनबल सकल गिरा देते हैं |
ये जो अपने होते है न अपने , ये अपनेपन से ही ढ़हा देते है |
तुम क्या जानो दुनियादारी , चार किताब है समझ तुम्हारी |
दुनिया ठगनी अर तुम भोले , हम पर छोड़ो जिम्मेदारी |
फिर गाढ़ी म्हणत का पैसा , लेकर कहीं फंसा देते है |
ये जो अपने होते है न अपने , ये अपनेपन से ही ढ़हा देते है |
सोमवार, 10 अगस्त 2026
Order Number 22
जानते हो मुझे ऐसे कैफे में बैठ कर चाय पीना क्यों पसंद है | वो यूँ के ऐसे ही चाय के साथ बैठ मैंने न जाने कितने ही लोगो को खोला है | ऐसे लोग जो खुशहाल शादियों में है पर जिन्होंने सालों से अपने पार्टनर का हाथ तक नहीं थामा | लोग जो ऊँचे ओहदो पर है पर उनका बस चले तो सब कुछ छोड़छाड़ कर पहाड़ भाग जाए ,अकेले।
लोग जिनकी अपने भाई बहनो से बात तक नहीं होती , प्रॉपर्टी के चक्कर में |
चाय की चुस्कियों के साथ पीना सीख रहा हूँ मैं उनका अकेलापन , उनका गिल्ट , उनकी बेबसी , उनका ट्रामा |
हर इंसान भरा बैठा है | मैं सीख रहा हूँ उसे खोलना , हर एक कप चाय के साथ |
शनिवार, 8 अगस्त 2026
मेरी पीढ़ी के लोग
लोग , मेरी पीढ़ी के लोग
जो मानते रहे और जीते रहे इस फलसफे को कि रहा जा सकता है एक ही घर में बिना प्यार क्योकि खुद के वजूद से कही बड़ा होता है परिवार
पीढ़ी आखिरी पीढ़ी जिसके नितम्बों पर आज भी छपे है बचपन में अनुशासन में बाँधने को बरसी कमचियों के निशान
पीढ़ी जिसने अपनी पहली तनख्वाह से खरीदा था अपना पहला फ़ोन
पीढ़ी जो छिपाती रही माँ की बात बीवी से , बीवी की बात माँ से इस उम्मीद कि क्या हर्ज़ है जो जुड़ा रहे परिवार रहकर थोड़ा मौन
लोग जिन्होंने अपने शौक अपनी इच्छाएं अपनी पसंद सब बाँध दिया खूंटी पर
जुट गए ऐसे कामों में जहाँ रोज पीना होता है खून का एक घूँट
देखता हूँ क्षितिज में कैसे नए आत्ममुग्ध लोग उतरे आ रहे हैं
सब कुछ सहकर जीने वाली मेरी पीढ़ी के लोग अब बुढ़ा रहें हैं
बुधवार, 5 अगस्त 2026
असली खेल
भ्रम में जी रहे हो तुम ,अगर तुम्हें लगता है कि AI, या कोई भी कटिंग एज टेक्नोलॉजी सीख लेने से तुम्हारा करियर उड़ान भर देगा l
हो सकता है ये चंद साल तुम्हारी जॉब बचा ले जाये l सर्वाइवल लेवल पे ही l
असली स्किल कुछ और है l
असली स्किल है अपने ऑर्गेनाइजेशन में अपने से ऊपर बैठे ऐसे आदमी तक पहुँच पाना जिसके पास तुम्हे पोडियम पे खड़ा करने की अथॉरिटी है l
ना सिर्फ़ पहुँच पाना बल्कि उस आदमी को ये एहसास दिला पाना कि तुम उसके बड़े काम के आदमी हो l हर बड़े आदमी को बहुत सारे दाये हाथ बाये हाथ की दरकार होती है जो उसकी ख़ुद तरक्की झंडा उठा कर चलें lजिस दिन आप ने ये परसेप्शन बना लिया , समझ लो तरक्की की सीढ़ी पे तुम्हारा पाव पड़ गया l बाक़ी सब टेक्नोलॉजी आनी जानी है ल
सोमवार, 3 अगस्त 2026
रविवार भी बदल गया है |
सोचता हूँ मैं , कोई समाजविद क्यों नहीं ढूढ़ता इस बात का जबाब , कि अब अमूमन हर कामकाजी आदमी की जिंदगी में रविवार ऐसे क्यों नहीं आता , जैसे पहले ज़माने में आता था | लापरवाह सा , किसी त्यौहार सा | अब ऐसे आता है जैसे अगली सुबह जंग पर जाना है और आज ही अपनी रसद जुटाना है | अजीब सा चिड़चिड़ा , feel low day हो गया है रविवार | क्यों हो गया है ऐसा ?
दुनिया बदल गयी है | रविवार भी बदल गया है |
बुधवार, 29 जुलाई 2026
मुचलका
मुचलका
इमारतें , ये बुलंद इमारतें , स्विमिंग पूल , जकूज़ी और जिम से सजी इमारते
इमारतें जिनमे गाड़ी के लिए गार्ड बेरिकेडिंग हटाते हैं |
ये इमारतें दरअसल एक मुचलका हैं पूंजीपतियों और अमीरी का एहसास लेने की ख्वाइश लिए मिडिल क्लास आदमी के बीच दस्तखत किया गया एक एग्रीमेंट
अग्रीमेंन्ट जो एक मुआयदा है इस बात का कि तमाम जलालत , तमाम हरस्मेंट और टोटल बर्नआउट के बावजूद यह आदमी अपनी नौकरी से चिपका ही रहेगा | हमेशा
इमारते जिनमे गार्ड गाडी के लिए बेरिकेडिंग हटाते है
कि तमाम जलालत , तमाम हरैसमेंट , टोटल बर्न आउट के बाबजूद ये आदमी अपनी नौकरी से चिपका ही रहेगा , हमेशा |
शुक्रवार, 24 जुलाई 2026
असली मेजोरिटी
ये जो शक्ति प्रदर्शन करते हैं न लोग , मुद्दे लपक कर भीड़ के बीच में मंच पर मेजोरिटी का रहनुमा बन रहे होते है , ये सब झूठे है |
कोई भी भीड़ जो प्रदर्शन करती है न कितनी भी बड़ी क्यों न हो मेजोरिटी नहीं होती |
असली आदमी जो मेजोरिटी में है वो वह आदमी है जो प्रदर्शन के चलते रास्ता जाम होने की वजह से गलियों से निकल काम पर पहुंच रहा होता है |
उसकी जिंदगी का मिशन होता है | परिवार के लिए रोटी और अदद सम्मान जुटाना ,बस |
और इस मिशन के लिए वो न सरकार को ताकता है न यूनियन को न किसी मसीहा को, न इंटेल्लेक्टुअल्स को , न कम्युनिस्ट्स को |
वो चुप चाप निकल रहा होता है सब जानते हुए कि कौन सा नारा खोखला है कौन ढोंगी है , कौन उछाला जा रहा है कौन चमकाया जा रहा है |
वो देख रहा होता है कैसे मीडिया बोनो को महामानव बना पेश कर रहा है | कैसे बिना कार्ल मार्क्स पढ़े लोग समाजवादी बने है कैसे गाँधी को जाने बिना लोग प्रजातान्त्र पर भाषण पेल रहे होते हैं |
वो सब जानता है और सब जानने के बाबजूद वह सुकून चाहता है | सिर्फ सुकून |
गुरुवार, 23 जुलाई 2026
भिंचाले में फंसा तकिया
शनिवार, 18 जुलाई 2026
और फिर एक दिन
कितने ही प्रेम निवेदन ठुकरा दिए मैंने |
इस गुमान में कि कही कोई फ्यूचर में है जो सबसे बेहतर है और जो मेरे इंतज़ार में है |
कितनी ही यात्राओं के प्रस्ताव जो मेरे दोस्तों ने रखे , मैंने नकार दिए , इस हुनक में कि अभी समय नहीं है |
कितने ही पहाड़ , समंदर , झरने जो मेरी जद में थे , मैंने नहीं घूमे , इस मकसद में कि पैसा बचाना है |
कितने शगल , कितने शौक जो मुझे जिंदादिली से जीने का एहसास दिला सकते थे , मैं सबको रौंधता चला गया |
इस गलतफहमी में , कि एक दिन मेरा दौर आएगा , अभी उम्र पड़ी है |
आँखो पर पड़े पर्दो से मैंने देखा कि मेरी जवानी का झरना सदानीरा है , जो बस बहता ही जायेगा | बहता ही जायेगा | हमेशा |
और फिर एक दिन मैं बूढा हो गया |
जिंदगी उतनी लम्बी नहीं है , जितना हम सोचते हैं !
Life is shorter than it appears . Live it.
An original by Sachin Kumar Gurjar
कहना सीखो
कहना सीखो | वे बातें जो कहने की हैं |
उनसे , जिनके होने से तुम हो |
क्योंकि वक़्त ऐसा भी आता है कई बार | कि तुम जाते हुए आदमी को रोकना चाहते हो |
चाहते हो कि अपनी जिन्दगी के बैलेंस से कुछ वक़्त उन्हें दे दो | इतना वक़्त कि वो बाते जो तुम उनसे कहना चाहते हो , कह पाओ |
मलाल कभी उन बातों का नहीं होता जो कह दी जाती हैं | उन बातों का होता है जो तुम कह नहीं पाते | इसलिए कहना सीखो | उनसे जिनसे तुम कहना चाहते हो |
मंगलवार, 7 जुलाई 2026
Takiya
दलील सुने जाने की रिवायत में जब मुझसे कहा गया कि पूछो अगर कुछ पूछना है ,तो
मैंने पूछा "सर,आप ये बताइयेगा कि एक तकिये का क्या इस्तेमाल है ?"
उन्होंने कीबोर्ड पीटना चालू रखा और कहा " तकिया,सिर के नीचे लगाया जाता है "
मैंने कहा " नहीं, तकिया सिर के नीचे भी लगाया जाता है !"
"गुस्ताखी माफ़ पर गत वर्ष में मुझे मेरे दिए रोल के अलावा जहाँ भी फ़िट किया गया ,जब भी किया गया ,मैंने अपनी शिद्दत से काम किया है। बिना इस प्रतिरोध कि यह या वह मेरा काम नहीं है "
उन्होंने हमारे बीच पाले में रखा लैपटॉप एक तरफ़ खिसका दिया और कहा "पता है,तुम्हारा और तकिये का प्रॉब्लम क्या है ? तुम दोनों ही लचर पचर हो l कहीं भी फ़िट हो जाना कोई स्किल नहीं है l
कुछ तो ऐसा हो कंक्रीट,सॉलिड जिसे शोकेस किया जा सके l बोलो "
"आप चाहेंगे कभी,ऐसा तकिया इस्तेमाल करना ,जिसमे कंक्रीट हो !" मैंने कहा l
जबाब में उन्होंने एक गहरी साँस ली बस l
और इस तरह,साल में एक बार होने वाली मेरी अप्रैसल मीटिंग बिना किसी वेतनवृद्धि, बिना किसी शाबाशी ख़त्म हो गई l
:सचिन कुमार गुर्जर
शुक्रवार, 3 जुलाई 2026
toxicity
सभी इंसान अच्छे होते हैं , तब जबतक सब कुछ अच्छा चल रहा होता है |
अधिकतर इंसान ख़राब होते जाते है , तब जब सब कुछ एक है नहीं चल रहा होता |
और ये ख़राब इंसान खुद तक ही ख़राब नहीं रहते | किसी टोकरे में रखे आमों में फैली सड़न के माफिक ये सड़न फैलती है | अच्छे आदमी भी इस सड़न की जद में आते जाते हैं |
ये जो आसमान में छेद करती बुलंद इमारतें हैं ना इन्हे आप किसी गोदाम के सफों पे सजी आम की पेटियों जैसा समझिये और इनमे काम करने वालों को आम |
आम , जो कुछ सड़े हुए हैं | कुछ सड़न की कगार पे हैं | कुछ ऐसे हैं जो कैसे भी कर इस सड़न से छूट जाना चाहते हैं |
आज , दस में से आठ आदमी इस सवाल से रूबरू है कि इस माहौल में उसका मुस्तकबिल क्या है |
क्या उसमे कुछ ऐसा है , कोई भी थोड़ा बहुत हुनर , या कोई भी ऐसा काम करने का बूता जो उसे इस सड़न से मुक्ति दिला सके |
कुछ क्रिएटिव आर्ट , प्रॉपर्टी , शॉप , कोई ऑनलाइन बिज़नेस , फार्मिंग , कोई फ्रैंचाइज़ी , कोई पीसफुल रिमोट जॉब , कोई अपनी खुद की गुमटी |
कुछ भी ऐसा है जो उसका खुद का हो ऐसा हो जो सुकून से कुछ कम भी कमा जीवन यापन का झरोखा खोल दे |
लेकिन क्या सालों की जॉब कंडीशनिंग , फॅमिली की जिम्मेदारी , जकड़े आदमी के पास इतना गूदा बचता है कि वो नए काम की uncertainity में कूदे ?
ये डर है और ये वाजिब डर है | और ये डर उसे बर्दाश्त करते चले जाने की सलाह देता है | वो सिकुड़ता जाता है | जमीन छोड़ता जाता है |
और उसका ये जमीन छोड़ना , अपने पाले में पीछे हटते जाना टॉक्सिसिटी की जमीन तैयार करता है | जमीन जिसमे फूल मुरझाते जाते है और कैक्टस फलते फूलते हैं |
सवाल ये है कि कॉर्पोरेट में क्या वाकई हालात इस कदर ख़राब है कि हर दूसरा आदमी ड्रैकुला जैसे लम्बे दाँत लिए खून पीने को आतुर हैं | या खुद की इन्सेक्युरिटीज़ से जूझते लोग अपने साथ काम करने वालो , अपने नीचे काम करने वालों की जिंदगी जहन्नुम बनाते जा रहे हैं |
आप क्या सोचते हैं ?
रविवार, 28 जून 2026
मत कहो उनसे
मत कहो उनसे कि उन्होंने तुम्हारे लिए किया ही क्या है !
उन्होंने जिन्होंने , जेठ की दुपहरी में कमाकर , अपना पेट काटकर तुम्हे अच्छे से अच्छे स्कूलों तक भेजा है |
: मेहनतकश माता पिताओं को समर्पित
शनिवार, 6 जून 2026
आखिरी खुशफहमी
ये उम्र के साथ साथ सारी खुशफहमियाँ जैसे बह सी गयी है सिवाय एक खुशफहमी के वो ये कि अगर तुम होतीं तो मैं तुम्हारे साथ उम्र भर ख़ुशी खुशी जीता | और शायद इस खुशफहमी को जिन्दा रखने के लिए ही तुम्हारा चले जाना जरूरी रहा होगा |
सोमवार, 1 जून 2026
Manipulators
ये जो तुमसे प्यार में शर्ते रखते हैं न , ये असल में manipulators हैं |
जिन्हे तुम अपना वजूद किसी कोरे कागज़ की तरह सौंपते हो और जब तक इनके चंगुल से बाहर आते हो तब तक तुम खुद रद्दी जैसा महसूस करने लगते हो |
रविवार, 31 मई 2026
मुक्तिबोध
मैं खुद हूँ
उम्र लग गयी मुझे ये समझने में कि मैं अनमोल हूँ |
दूसरों के लिए नहीं , खुद के लिए |
और मुझे अपने अनमोल होने का ना किसी को कोई सबूत देना है और न ही कुछ साबित करना है |
क्योकि मुझे मेरे अनुभव में सिखाया है कि सब आने जाने है | आखिर तक जो साथ खड़ा रहेगा वो मैं खुद हूँ |
मंगलवार, 26 मई 2026
खुद से प्यार
दिल हमेशा लगड झगड़ कर ही नहीं तोड़े जाते | न ही बेवफाई हमेशा गुनेहगार होती है |
कई बार इतना भर कह देना कि अब उम्र हो गयी हैं आदमी की प्रेमकहानी का उपसंहार हो जाता है |
कहानियाँ , प्रेम कहानियाँ ये सब मिलन पे ख़तम नहीं होती | ना ही सबकी नियति में लड़ाई झगड़ा होता है , न ही बेवफाई |
कई बार इतना भर कहा जाना कि अब उम्र हो गयी हैं , आदमी की प्रेमकहानी का उपसंहार बन जाता है |
ठीक उस दिन
ये सब को खुश रखने के फ़र्ज़ तले खुद को धुनते जाने के क्रम में तुम्हारी जिंदिगी में कही कोई ऐसा दिन आएगा कि जब दिल कहेगा कि रुको यार जीवन तो मेरा भी सीमित ही है
और उस दिन , ठीक उस दिन , तुम्हे प्यार हो जायेगा | खुद से , एकांत से और चाय से |
शनिवार, 23 मई 2026
अगर बीवियाँ न होतीं
अगर बीवियाँ न होतीं तो लूट लिए जाते न जाने कितने ही मर्द उनके अपने सगे भाई बहन और सम्बन्धियों द्वारा |
चूस लिए जाते न जाने कितनी ही चुड़ैलों द्वारा जो हर गली हर नुक्कड़ पर कंगूरों से लटकी प्रेम का मकड़जाल बुने ताक में रहती हैं !
बीवियाँ इंसान नहीं होतीं , फरिश्ता होती हैं जो मर्दो को जवानी की तमाम दिक्कतों से निकाल बुढ़ापे की ओर सुरक्षित ले जाती हैं |
शुक्रवार, 15 मई 2026
खुद के कैदी
वे जो कानून के कैदी हैं उनकी जमानत देर सवेर हो ही जाती है |
वे जो खुद की रची हुई जेल में सजायाफ्ता हैं , उनका जमानती कोई नहीं होता | कोई भी तो नहीं |
हिंदुस्तान में हर तीसरा शख्स गलत रिश्ते में फंस ताउम्र की सजा में कैद है |
उसके नीरस जीवन में बच्चे पालने के अलावा कुछ भी तो नहीं |
बोगेनविलिया के फूल
आपने कभी गौर किया है कि ये बोगेनविलिया के फूल जितनी ज्यादा गर्मी हो और जितना ज्यादा सूखा हो , ये उतना ही चटक खिलते है | इंसानो का भी कुछ ऐसा ही है ना | आदमी जितनी ज्यादा तपिश झेलेगा , उतना ही बेहतर होकर खिलेगा |
रविवार, 10 मई 2026
परेशानी का सबब
परेशानी मेरी भी और तुम्हारी भी अक्सर इस बात को लेकर होती है कि हमे लगता है कि हम वहाँ नहीं है जहाँ हमे होना चाहिए था !
रविवार, 3 मई 2026
लोग अपने माँ बाप से कितना कम बात करते हैं !
ये फ़ोन पर बात करते हुए , तुम्हारे माँ बाबा सेहत कैसी है, नौकरी कैसी चल रही है इससे आगे का संवाद अगर नहीं जानते तो इसे उनकी बढ़ती उम्र या कम तुजुर्बा कभी मत समझना |
हो सकता है बाहर की दुनिया में जीते जीते तुम खुद ही इतने व्यस्त हो गए हो कि अपने माँ बाबा के लिए नयी बातें , नए किस्से , और अपनी दुनिया के छोटे छोटे रंग बचाकर ले जाना भूल गए हो |
कलेजा बैठ जायेगा तुम्हारा , अगर जान लोगे कि "सो कॉल्ड सक्सेसफुल" लोग अपने माँ बाप से कितना कम बात करते हैं !
गुरुवार, 30 अप्रैल 2026
दहेज़ लेना पाप नहीं है |
दहेज़ लेना पाप नहीं है |
उन तमाम लोगों से जिन्होंने बेटी को हमेशा 'पराया धन ' कहकर ही पाला है |
ऐसे लोगों से 'पराये धन' की भरपूर वसूली जायज है |
पढाई आदमी को अमीर नहीं बनाती |
पढाई दुनिया की कोई भी पढाई आदमी को अमीर नहीं बनाती |
हाँ , ये उसे ऐसे गरीब में जरूर तब्दील कर देती है , जिसकी हरकतें अमीरों जैसी हो जाती हैं !
शुक्रवार, 24 अप्रैल 2026
उन्हें ग्लैमरस सपने नहीं आते
लड़कों को , जिन्हे मिलकियत के नाम पे मिलती है सिर्फ दो बीघा जमीन , लोन में डूबे हुए माँ बाप , गली का पतला मकान , और जवान होती बहन | ऐसे लड़कों को सपने नहीं आते : पैशन के , ऊँचे बिज़नेस के , स्टार बन जाने के | उन्हें नज़र आती है तो सिर्फ सरकारी नौकरी | एक अदद सरकारी नौकरी जो पूरे परिवार को उबार सकती है |
एक अदद सरकारी नौकरी पूरे परिवार के सम्मानपूर्ण जीवन की गारंटी होती है |
Survival mode
ये जो कांच के ऊँचे कॉर्पोरेट ऑफिस से घर लौटते लोग है न ,
इनमे से न जाने कितने सिर्फ survival mode में ही जीते हैं
नौकरी में survival, work visa में survival , पर्सनल रिश्ते , फिजिकल हेल्थ , मेन्टल हेल्थ , सब में बस जैसे तैसे survival
विडंबना ये है कि इनमे से बहुतों के जीवन में बिना डर जीने का मोड़ शायद कभी नहीं आएगा |
survival mode से सीधे not fit for work mode ही आएगा
बुधवार, 22 अप्रैल 2026
विरोधाभास
कितना मज़ेदार विरोधाभास है ये कि अनाप शनाप कीमतों में तुम्हें चीज़ें बेचकर , तुम्हे गरीब करने वाले ये ब्रांड्स तुम्हे बदले में अमीर होने का एहसास बेचते है !
और उतनी ही मज़ेदार बात ये कि इस लेवल के मैनीपुलेशन में जहाँ ये तय इंडस्ट्री तय करती है कि तुम्हे इस साल क्या पसंद आएगा , तुम ख़ुशी खुशी सारा सामान माय लाइफ - माय चॉइस समझ के उठा रहे होते हो !
मंगलवार, 21 अप्रैल 2026
स्पोर्ट्स शूज
जमाना लग गया | स्त्रियों को सलवार के साथ स्पोर्ट्स शूज पहन कर काम पर जाने में |
क्योंकि उसे विरासत में सलवार ही मिली है | स्पोर्ट्स शूज उसने पुरुषों के वर्चस्व वाले दंगल में
अपना कौशल दिखा कर जीते है |
बुधवार, 15 अप्रैल 2026
प्रेम केवल वहाँ टिकता है
रिश्ते में प्रेम कहाँ टिकता है ? केवल वहाँ , जहाँ दोनों को लगता हो कि मुझे मेरी औकात से ज्यादा मिला है |
कहीं और ऐसा ना मिल पाता |
बाकि की सारी दुनिया अपने रिश्ते सीजफायर मोड जी रही है | दबे ढके , इधर उधर से समर्थन की जुगत में लगी ही रहती है |
रोना छोड़ दोगे अपने रिश्ते के अधूरेपन का , जिस दिन जान लोगे कि सोशल मीडिया पे 'माय वाइफ , माय लाइफ ' , 'बेस्ट हबी इन दी वर्ल्ड ' के स्टेटस लगाने वाले भी अपने रिश्तों से खुश नहीं हैं !
शनिवार, 21 मार्च 2026
इंसान लड़ते ही रहेंगे
मंगलवार, 24 फ़रवरी 2026
ऐब भी हुनर
ये दुनिया तुम्हारे ऐबो में भी हुनर ढूढ़ लेगी | वैसे ही जैसे एक अच्छे कवि की ख़राब कविता में लोग गूढ़ मायने तलाश लेते है |
शर्त बस इतनी है कि तुम्हारा शुमार कामयाब लोगों में हो |
गुरुवार, 19 फ़रवरी 2026
इत्ता सा सफर
गाँव के फार्म से शहर को निकला आदमी अपनी पूरी जवानी इस प्रयोजन में काट देता है कि वो बुढ़ापे में अपने फार्महाउस में आराम से रहेगा |
यानि कि उसकी जिंदगी की तमाम भागदौड़ का हासिल फार्म से फार्महाउस तक का सफर ही है |
विडंबना ये कि ये सफर भी विरले ही हासिल हो पाता है !
काम हमेशा रहेगा
ये जो दुनिया भाग भाग कर काम कर रही है
काम को खत्म कर देना चाहती है
क्या इसे नहीं पता
काम कभी खत्म नहीं होता
इंसान खत्म हो जाता है |
काम शाश्वत होता है
तुम्हारी व्यस्तताएँ फ़र्ज़ी हैं | तुम्हारे 'जरूरी' काम , दुनिया के लिए इतने जरूरी नहीं है, जितने तुम्हे लगते हैं |
सोमवार, 16 फ़रवरी 2026
वह हीरो नहीं है
अपनी निजी जिंदगी खूंटी पे टाँगकर ऑफिस में दूसरों से ज्यादा और तय घंटों से देर तक काम करने वाला आदमी कोई हीरो नहीं होता |
इसके बरक्स , ऐसा आदमी , अनजाने में ही अपने साथियों के लिए एक ऐसा बेंचमार्क खड़ा कर रहा होता है , जो असाध्य भी है और गैरजरूरी भी |
और इसके बदले में वो खुद क्या पाता है ? परसेंट दो परसेंट ज्यादा सैलरी , थोड़ा सा ज्यादा बोनस , जिससे वो पास के मॉल में जाकर या ऑनलाइन ही , गैरजरूरी सामान खरीदता है | खुद को पैंपर करने के नाम पर |
यानी कि ये आदमी अपने कलीग्स के लिए तो नुकसानदायक होता ही है , ये ब्लाइंड consumerism की लालची मशीन में ईंधन झोंक धरती को भी नुक्सान पंहुचा रहा होता है |
क्या आपके आस पास है कोई ऐसा आदमी ?
शुक्रवार, 13 फ़रवरी 2026
ये ऊंचे औहदों पर बैठे लोग इतने क्रूर क्यों होते हैं
"ये ऊंचे औहदों पर बैठे लोग इतने क्रूर क्यों होते हैं? इसलिए... क्योंकि तरक्की की सीढ़ी के पायदान लकड़ी के नहीं होते, ज़िंदा आदमियों के सिर के ऊपर पैर रखकर ऊपर चढ़ना होता है। शरीफ़ दिल का भोला आदमी या तो ऊपर चढ़ ही नहीं पाता, या भूले से चढ़ भी गया... तो वहां उसका कोई वक़ार, कोई रुतबा नहीं होता।"
गुरुवार, 12 फ़रवरी 2026
असली स्त्रियों के मूछें भी होती हैं |
सारी उम्र बाहरी रूप और रोमांच के पीछे भागने वाले पुरुष ये स्वीकार ही नहीं कर पाते कि असली स्त्रियों के मूछें भी होती हैं |
और ये स्वीकार न कर पाना , उनके भीतर एक नासूर की तरह रिसता है | जिसके चलते वे एक चमक से दूसरी चमक , एक शरीर से दुसरे शरीर के पीछे भागते रहते है | पर सुकून कही भी नहीं आता |
असलीप्रेम असली लोगों से ही मिल सकता है , मोम के पुतलो से नहीं |
मंगलवार, 3 फ़रवरी 2026
बजरबानी
बजरबानी
बजरबानी नहीं जानती, क्या होता है फेमिनिज्म !
उसका मर्द जब शराब में धुत्त , किसी के चबूतरे पे पड़ा होता है ,तो वो उठाती है उसे उसकी गुदधी से पकड़ |
ला पटकती गई भूसे के कोठड़े में , जहाँ सूख जाता है आदमी का नशा और गुरूर , दोनों ही |
बजरबानी , नहीं जानती क्या होते है वीमन राइट्स के शिगूफे |
हाँ , वो जब देखती है कि विष्ठा खाने निकला है उसका आदमी ,तो वो अपने घुटने के सटीक वार से चटका देती है उसकी मरदी !
और उतार देती है इश्क़ का बुखार | बजरबानी को क्या पता , क्या होते है गुड पेरेंटिंग के चोचले | वो जब पाती है कि स्कूल को निकला उसका जाया , बस्ता छुपा
खदाने में गेंद बल्ला नचा रहा है | तो वो आग फूखने की फुकनी से तोड़ देती है अपनी कोख से जने जाए का मंघर |
और जोड़ देती है बिगड़ा हुआ अनुशासन | ठोकती , बजाती , दनदनाती , सबको सही रास्तों पे लाती |पालनकर्ता, मुखिया ,करताधर्ता , सब कुछ होती है बजरबानी |
बस गिड़गिड़ाती बेचारी अबला नहीं होती !
सचिन कुमार गुर्जर
टाइमपास
कभी गम मत मनाना इस बात का कि कोई तुम्हे महज टाइम पास समझकर , तुम्हारा इस्तेमाल कर आगे निकल गया | अपने किसी परमानेंट की तलाश में | हाँ , तु...
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I must thank to my frined Ajeet who persuaded me to go for this memorable trip to Langkawi. Langkawi is definitely among best and most sp...
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बक्सा , बाल्टी, एक अदद मग्गा , कुछ जोड़ी कपडे , बिस्कुट , दालमोठ और पंजीरी | इंतज़ाम तो कुछ ऐसा था जैसे कोई फौजी पल्टन को जाता हो | ऐसे जैसे ...
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This is wonderful morning today. I got up with pleasant breeze blowing though my window. Sky is covered with thick clouds and sproadic down...

