रविवार, 31 मई 2026

मैं खुद हूँ

 उम्र लग गयी मुझे ये समझने में कि मैं अनमोल हूँ |

दूसरों के लिए नहीं , खुद के लिए | 

और मुझे अपने अनमोल होने का ना किसी को कोई सबूत देना है और न ही कुछ साबित करना है | 

क्योकि मुझे मेरे अनुभव में सिखाया है कि सब आने जाने है | आखिर तक जो साथ खड़ा रहेगा वो मैं खुद हूँ |   


कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

टिप्पणी करें -

आखिरी खुशफहमी

ये उम्र के साथ साथ सारी  खुशफहमियाँ जैसे बह सी गयी है  सिवाय एक खुशफहमी के वो ये कि अगर तुम होतीं तो मैं तुम्हारे साथ उम्र भर ख़ुशी खुशी जीता...