अगर बीवियाँ न होतीं तो लूट लिए जाते न जाने कितने ही मर्द उनके अपने सगे भाई बहन और सम्बन्धियों द्वारा |
चूस लिए जाते न जाने कितनी ही चुड़ैलों द्वारा जो हर गली हर नुक्कड़ पर कंगूरों से लटकी प्रेम का मकड़जाल बुने ताक में रहती हैं !
बीवियाँ इंसान नहीं होतीं , फरिश्ता होती हैं जो मर्दो को जवानी की तमाम दिक्कतों से निकाल बुढ़ापे की ओर सुरक्षित ले जाती हैं |
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