शनिवार, 23 मई 2026

अगर बीवियाँ न होतीं


अगर बीवियाँ न होतीं तो लूट लिए जाते न जाने कितने ही मर्द उनके अपने सगे  भाई बहन और सम्बन्धियों द्वारा | 

चूस लिए जाते न जाने कितनी ही चुड़ैलों द्वारा जो हर गली हर नुक्कड़ पर कंगूरों से लटकी प्रेम का मकड़जाल बुने ताक में रहती हैं  !

बीवियाँ इंसान नहीं होतीं , फरिश्ता होती हैं जो मर्दो को जवानी की तमाम दिक्कतों से निकाल बुढ़ापे की ओर सुरक्षित ले जाती हैं | 



कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

टिप्पणी करें -

जालिम हूँ मैं !

 जालिम हूँ मैं ! मार देता हूँ अपनी खुशियाँ कुछ ऐसे भी |  गुजरता हूँ अकेले कई बार , खूबसूरत नज़ारो से |  होना चाहता हूँ खुश |  और फिर सोच देता...