रविवार, 31 मई 2026
मुक्तिबोध
मैं खुद हूँ
उम्र लग गयी मुझे ये समझने में कि मैं अनमोल हूँ |
दूसरों के लिए नहीं , खुद के लिए |
और मुझे अपने अनमोल होने का ना किसी को कोई सबूत देना है और न ही कुछ साबित करना है |
क्योकि मुझे मेरे अनुभव में सिखाया है कि सब आने जाने है | आखिर तक जो साथ खड़ा रहेगा वो मैं खुद हूँ |
मंगलवार, 26 मई 2026
खुद से प्यार
दिल हमेशा लगड झगड़ कर ही नहीं तोड़े जाते | न ही बेवफाई हमेशा गुनेहगार होती है |
कई बार इतना भर कह देना कि अब उम्र हो गयी हैं आदमी की प्रेमकहानी का उपसंहार हो जाता है |
कहानियाँ , प्रेम कहानियाँ ये सब मिलन पे ख़तम नहीं होती | ना ही सबकी नियति में लड़ाई झगड़ा होता है , न ही बेवफाई |
कई बार इतना भर कहा जाना कि अब उम्र हो गयी हैं , आदमी की प्रेमकहानी का उपसंहार बन जाता है |
ठीक उस दिन
ये सब को खुश रखने के फ़र्ज़ तले खुद को धुनते जाने के क्रम में तुम्हारी जिंदिगी में कही कोई ऐसा दिन आएगा कि जब दिल कहेगा कि रुको यार जीवन तो मेरा भी सीमित ही है
और उस दिन , ठीक उस दिन , तुम्हे प्यार हो जायेगा | खुद से , एकांत से और चाय से |
शनिवार, 23 मई 2026
अगर बीवियाँ न होतीं
अगर बीवियाँ न होतीं तो लूट लिए जाते न जाने कितने ही मर्द उनके अपने सगे भाई बहन और सम्बन्धियों द्वारा |
चूस लिए जाते न जाने कितनी ही चुड़ैलों द्वारा जो हर गली हर नुक्कड़ पर कंगूरों से लटकी प्रेम का मकड़जाल बुने ताक में रहती हैं !
बीवियाँ इंसान नहीं होतीं , फरिश्ता होती हैं जो मर्दो को जवानी की तमाम दिक्कतों से निकाल बुढ़ापे की ओर सुरक्षित ले जाती हैं |
शुक्रवार, 15 मई 2026
खुद के कैदी
वे जो कानून के कैदी हैं उनकी जमानत देर सवेर हो ही जाती है |
वे जो खुद की रची हुई जेल में सजायाफ्ता हैं , उनका जमानती कोई नहीं होता | कोई भी तो नहीं |
हिंदुस्तान में हर तीसरा शख्स गलत रिश्ते में फंस ताउम्र की सजा में कैद है |
उसके नीरस जीवन में बच्चे पालने के अलावा कुछ भी तो नहीं |
बोगेनविलिया के फूल
आपने कभी गौर किया है कि ये बोगेनविलिया के फूल जितनी ज्यादा गर्मी हो और जितना ज्यादा सूखा हो , ये उतना ही चटक खिलते है | इंसानो का भी कुछ ऐसा ही है ना | आदमी जितनी ज्यादा तपिश झेलेगा , उतना ही बेहतर होकर खिलेगा |
रविवार, 10 मई 2026
परेशानी का सबब
परेशानी मेरी भी और तुम्हारी भी अक्सर इस बात को लेकर होती है कि हमे लगता है कि हम वहाँ नहीं है जहाँ हमे होना चाहिए था !
रविवार, 3 मई 2026
लोग अपने माँ बाप से कितना कम बात करते हैं !
ये फ़ोन पर बात करते हुए , तुम्हारे माँ बाबा सेहत कैसी है, नौकरी कैसी चल रही है इससे आगे का संवाद अगर नहीं जानते तो इसे उनकी बढ़ती उम्र या कम तुजुर्बा कभी मत समझना |
हो सकता है बाहर की दुनिया में जीते जीते तुम खुद ही इतने व्यस्त हो गए हो कि अपने माँ बाबा के लिए नयी बातें , नए किस्से , और अपनी दुनिया के छोटे छोटे रंग बचाकर ले जाना भूल गए हो |
कलेजा बैठ जायेगा तुम्हारा , अगर जान लोगे कि "सो कॉल्ड सक्सेसफुल" लोग अपने माँ बाप से कितना कम बात करते हैं !
डरता हूँ मैं
डरता हूँ मैं कई बार नौकरी छोड़ देने के विचार से तमाम थकान के बावजूद | इस विचार से कि उस दुनिया में जहाँ हर वो आदमी जो काम पर नहीं है , ना...
-
बक्सा , बाल्टी, एक अदद मग्गा , कुछ जोड़ी कपडे , बिस्कुट , दालमोठ और पंजीरी | इंतज़ाम तो कुछ ऐसा था जैसे कोई फौजी पल्टन को जाता हो | ऐसे जैसे ...
-
I must thank to my frined Ajeet who persuaded me to go for this memorable trip to Langkawi. Langkawi is definitely among best and most sp...
-
This is wonderful morning today. I got up with pleasant breeze blowing though my window. Sky is covered with thick clouds and sproadic down...