गुरुवार, 19 फ़रवरी 2026

इत्ता सा सफर

गाँव के फार्म से शहर को निकला आदमी अपनी पूरी जवानी इस प्रयोजन में काट देता है कि वो बुढ़ापे में अपने फार्महाउस में आराम से रहेगा | 

यानि कि उसकी जिंदगी की तमाम भागदौड़ का हासिल फार्म से फार्महाउस तक का सफर ही है | 

विडंबना ये कि ये सफर भी विरले ही हासिल हो पाता है ! 

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