"ये ऊंचे औहदों पर बैठे लोग इतने क्रूर क्यों होते हैं? इसलिए... क्योंकि तरक्की की सीढ़ी के पायदान लकड़ी के नहीं होते, ज़िंदा आदमियों के सिर के ऊपर पैर रखकर ऊपर चढ़ना होता है। शरीफ़ दिल का भोला आदमी या तो ऊपर चढ़ ही नहीं पाता, या भूले से चढ़ भी गया... तो वहां उसका कोई वक़ार, कोई रुतबा नहीं होता।"
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