ये जो तुमसे प्यार में शर्ते रखते हैं न , ये असल में manipulators हैं |
जिन्हे तुम अपना वजूद किसी कोरे कागज़ की तरह सौंपते हो और जब तक इनके चंगुल से बाहर आते हो तब तक तुम खुद रद्दी जैसा महसूस करने लगते हो |
तुम समझा सकते हो दुनिया को , लेकिन समझा नहीं पाओगे किसी अपने को ही , कोई भी बात ! तुम समझाओ दुनिया को कि तुम अपनाते हो 50-30 -20 का रूल जब ...
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