मेरे घर पर आजकल पुताई का काम चल रहा है | चूँकि मैं छुट्टी में हूँ और पुताई , चिनाई ,खुदाई जैसे कामो को होते देखना मेरा बचपन से ही शगल रहा है | मैं सुबह की नरम धुप में बैठे नाखून कुतरते हुए पुताई होते देख रहा हूँ |
पुतैया का लड़का मेरे लड़के से बमुश्किल साल दो साल बड़ा ही होगा | मसें अभी ढंग से काली भी नहीं हुई हैं | उसके हाथ सीढ़ी पर चढ़े उसके बाप से भी तेज़ चलते हैं | उसने दुमंजिले की पुताई से पहले छज्जे पर लगे शीशे के पैनल बड़ी ही सफाई से उतार एक तरफ रख दिए है | और कूची से छज्जे की छत में बने फूल में बारीकी से रंग भर रहा है |
कल मैं पुतैय्या के साथ रंगो का चुनाव कर रहा था तो उसका लड़का हमारे पास आया और सलाह दी कि पट्टी में मरून के साथ चारकोल का शेड ले लो | और छत को बीज में रहने दो | जब हम गली में खड़े ये सब बातें कर रहे थे तो मैं घर के अंदर से आते हुए शोर को सुन रहा था | मेरा लड़का आज फिर अपनी मम्मी से लड़ रहा है कि उसे चाय के साथ पराठान हीं ओरयो बिस्कुट ही खाना है | पुट्ठी की खाली बाल्टी को रास्ते से दुमंजिले पर उठाने के लिए पुतैय्या के लड़के ने उससे मदद मांगी थी पर मेरा लड़का एक सीधी गाँठ ना लगा सका , जिससे बाल्टी खिंच जाए |
हाँ , एक्स्ट्राकरिकुलर क्लासेस होती हैं उसकी स्कूल में | जिसमे क्ले आर्ट सिखाई जाती है | फ्लूट की क्लास भी लेता है | पर क्या ही सिखाया जाता है स्कूल की एक्स्ट्रा करिक्युलर्स में !
क्या उसमे कुछ भी रियल वर्ल्ड स्किल होती है |
हालाँकि मेरा कोई इरादा नहीं है कि मेरा लड़का पुतैया बने , पर हमउम्र लड़कों में स्किल्स का इतना बड़ा गैप देखकर परेशां जरूर हूँ |
और मैं सोच रहा हूँ कि कही ये स्कूल की पढाई और हमारी परवरिश एक और मेरे जैसा कागजी शेर तो पैदा नहीं कर रही जो सिर्फ और सिर्फ नौकरी में ही कुछ असरदार हो सकता है और उसी पर निर्भर होगा |
समाज के एक बड़े हिस्से की नयी नस्ल सिर्फ और सिर्फ नौकरी के लिए तैयार हो रही है जिन्हे स्कूली पढाई के बाहर कुछ भी तो नहीं आता |
हम 50 -60 हज़ार की नौकरी के लिए समय और सामर्थ झोंकते है जबकि सच्चाई ये है कि हमारे आसपास ही काम करते कितने ही ऐसे कारीगर , कार्पेटर , इंटीरियर का छोटा काम करने वाले , वेल्डर , फैब्रीकेटर दिख जायेंगे जो लाख सवा लाख आराम से कमा रहे हैं | मैं पढाई को , नौकरी को छोटा नहीं बता रहा पर परवरिश में , स्कूल की पढाई में कुछ तो ऑफ है जिसमे सुधार होना चाहिए |
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