दुनिया को कोई दिलचस्पी नहीं है आप में , पर क्या ही करे बेचारी | इसकी ख़ुशी की जो पगडण्डी है उसकी सजावट में कुछ टाइल्स लगनी होती हैं | आपके दुखो की टाइल्स |
लेकिन आप बच सकते है इन दुखो से | एहसासो से जो लोग आपमें घोपने चाहते है |
हमने अपनी समूची जवानी के एवज में एक मकान लिया है शहर में | जवानी क्या बुढ़ापा तक गिरवी रखा है बैंक में |
अब ये कोई आलिशान मकान तो है नहीं जिसे हम फ्लेक्स कर सकें | ये एक बिना सीखचों का दो मंजिला मकान है जो एक गली में है | गली तंग तो नहीं है पर कतार में गाड़ियां लगने के बाद इतनी जगह नहीं बचती कि आप गली में खड़े होके हमारी दुमंजिली में लगे नजरौटे को देख सकें |
मैं तो शर्मा रहा था नजरौटा लगाने में पर बीवी ने कहा कि नज़र लगने से अच्छा है नजरौटा | क्योंकि नज़र लगने से अच्छा है नजरोटा | क्योंकि नज़र ऐसी भी होती है कि पत्थर को भी फोड़ देती है |
अब आदमी का मन होता है कि थोड़ी पीठ थपथपा ले अपनी खुद की |
पर लोग पूछते है कि कितने गज़ में है १०० गज ! हमारे बिट्टू भईया का तो 500 गज़ में है वसंतकुंज में !
लोकेशन क्या है | ओहो थोड़ी ऑफ लोकेशन है |
महंगा पड़ गया , इतने में तो स्मार्ट सिटी में हो जाता | अरे खम्बा आ गया उत्तर पूर्व में , वास्तु गड़बड़ हो गया |
मैं कान के पर्दो पर ही रोक देता हूँ ये संवाद |
और कहता हूँ कि अरे ये तो ऐसे ही ले लिया बच्चो का स्कूल पास में है |
असल में हम फार्म हाउस डेवेलोप कर रहे हम अपने गांव में | उसमे अमलतास के दो पेड़ है | उस पर हम ट्री हाउस बना रहे | पूरा हो जायेगा तो मंटो , प्रेमचंद , एंटोन चेखोव की किताबे सजेंगी वहाँ | बढ़िया कालीन बिछेगी | और ट्री हाउस के ठीक बगल में हम एक पोंड बना रहे है | ट्री हाउस की खिड़की से कांटा दाल मछली पकड़ा करेंगे | मेहदी हसन की ग़ज़ल चला करेंगी | वहां बैठ के चाय चला करेगी | अरे ये तो ऐसे हिले लिया टाइम पास |
और मैं ये सब इतने कन्विक्शन के साथ कहता हूँ कि उदास हो जाते है कुछ लोग |
आपके पास कोई मजबूत कहानी जरूर होनी चाहिए नहीं तो अपनी कहानी से मार डालनेगे तुम्हे दुनिया वाले |
दुनिया को कोई दिलचस्पी नहीं है आप में , पर क्या ही करे बेचारी | इसकी ख़ुशी की जो पगडण्डी है उसकी सजावट में कुछ टाइल्स लगनी होती हैं | आपके दुखो की टाइल्स |
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