शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026

कोई भी बात

तुम समझा सकते हो दुनिया को , लेकिन समझा नहीं पाओगे किसी अपने को ही , कोई भी बात !

तुम समझाओ दुनिया को कि तुम अपनाते हो 50-30 -20  का रूल जब बात पैसे की आती हो | 

और तुमने पढ़ रखी है मॉर्गन हौसल की साइकोलॉजी ऑफ मनी | 

लेकिन तुम्हारी बीवी हमेशा मानेगी कि बहुत जरूरी है कि तुम पर रखी जाए कड़ी नज़र जब बात पैसे की आती हो क्योंकि तुम लुटा दोगे सब , बाँट डोज सब जो कड़ी नज़र न रखी जाए | 


तुम बतलाओ दुनिया को कि जीवन जो है क्षणभंगुर है , इस पल है अगले पल नहीं | 

और दुनिया मानेगी कि बात जो तुमने कही है , सही है | 

पर तुम समझा नहीं सकोगे अपने ही माँ बाप को जो 70 की उमर में भी ऐसे लड़ते हो आपस में जैसे अभी अभी बिहाया है कोई नवयुगल , नवयुगल जिसका ईगो टकराता हो | 

तुम लिखो जवानी पर कोई कविता |  कि कैसे जवानी नायाब तोहफा है कुदरत का जिसे जिया जाए , पिया जाए ऐसे जैसे अमृतधारा हो | दुनिया मानेगी | 

लेकिन नकार देगा तुम्हारा विचार कोई तुम्हारा ही 

जो लड़ रहा है सालों से मुकदमा इस हुनक में कि जीवन मेरा जाए तो जाए , घसीटूंगा इसे लम्बा | ना खुद आगे बढ़ू न इसे बढ़ने दूँ | 


तुम कहो कि तुम मानते हो कि  शरीर आत्मा का मंदिर है और मंदिर है तो रखो इसे पाक साफ़ और दुनिया कहेगी कि बात तो सही है | 

लेकिन कोई  तुम्हारा अपना ही जो होगा लती किसी व्यसन का , पीता हो या फूंकता हो कुछ | वो मुँह पे ही कह देगा तुम्हारे | 

कि चार पैसे ज्यादा कमा लेते हो इसका मतलब कि ज्यादा जानते हो | और तुम रह जाओगे अवाक् | 


 तुम समझा सकते हो दुनिया को लेकिन समझा नहीं पाओगे किसी अपने को ही , कोई भी बात !



आपस में , 

नवयुगल जिसका ईगो टकराता हो |


पीया जाए 


तलाक़ का मुकदमा , इस हुनक में , कि जीवन मेरा जाए तो जाए 

शरीर आत्मा का मंदिर है 

बात 

 किसी व्यसन का या फुख्ता हो 

चार पैसे ज्यादा कमा 

तुम समझा सकते हो दुनिया को लेकिन समझा नहीं सकोगे कोई भी बात 


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