तुम तोड़ तो दोगे गरीबी का चक्र , अपनी मेहनत से |
लेकिन तुम नहीं तोड़ पाओगे उसका खौफ !
खौफ, जो दो पीढ़ियों तक चलता है |
जब भी तुम कहोगे कि तुम लौट जाना चाहते हो |
तो तुम्हारे अपने ही कहेंगे तुमसे , कि लौट तो आओ ,पर वापस आकर करोगे क्या ?
और उनके चेहरों की फ़िक्र मजबूर करेगी तुम्हे कि तुम बदस्तूर जारी रहो अपने हालातो में |
क्योंकि हालात तुम्हारे जो भी हों , इन्ही हालातों की वजह से घर के हालात बदले हैं |
तुम तोड़ तो दोगे गरीबी का चक्र , अपनी मेहनत से |
लेकिन तोड़ नहीं पाओगे उसका खौफ |
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