इंसानो को शिकायत रहती है कि वे भरी दुनिया में अकेले हैं , उन्हें कोई भाव नहीं देता |
सो मैंने फैसला किया है कि जिसे अकेला आऊंगा भाव दूंगा |
अभी वहाँ पुल पे लाल बत्ती में खड़ी थी कोई शख्सियत | झमकनी सी टीशर्ट डाले थी जिसमे से रंग बिरंगे फुँदने लटके थे | दुमंजली जितने ऊँचे सैंडल डाले थी | चुस्त पजमिया |
अब आप खुद ही बताओ | एक तो नीचे नदी बहे है आय-बाय -साय , जिसमे है हाथी डुबायु पानी | और निपट अकेली जान |
कलेजा दरक सा गया मेरा , मुझसे रहा न गया | हौंसला करके मैं गया और पूँछा " कि के जी क्या आप अकेले है , मैं अकेली आत्माओ को भाव देता हूँ , आप कहें तो आपको भाव दे लूँ ! बताएं |
उसे मेरे भारी एक्सेंट को समझने में थोड़ा टाइम लगा और जैसे ही समझ आया , बोली "हाउ डेयर यू "
मुझे लगा " हाउ डू यू डू " बोली है , मैंने कहा " आई ऍम फाइन , थैंक् यू "
पर जब उसने मुझे घूरा तब मुझे समझ आया कि उसका भाव भाव लेने वाला नहीं था |
और मैं चला आया ,सुबह काम पर भी जाना है |
पर आप ही बताइए मुझे ये आदमजात ऐसी क्यों है : शिकायत है कि अकेले हैं कोई भाव नहीं देता , भाव दो तो बिगड़ जाते है !
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