हम जो मिले थे मिले थे कुछ ऐसे हालात में ,
कि जिंदगी की गलती से बेजार थे , वे भी और मैं भी |
पाते रहे सुकून इस एहसास में कि बेहतर के हकदार थे
वे भी और मैं भी !
फिर हुआ यूँ कि उनकी 'गलती' ने अपनी गलती सुधार ली |
और मैं कुछ न कर सका सिवाय इसके के मैंने नए कपडे पहनने छोड़ दिए |
मिलते है अब तो पूछते है " बच्चे कैसे है ? " वे भी और मैं भी !
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