गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026

जुआरी आदमी

अगर तुम देखना चाहते हो कोई जुआरी आदमी तो तुम मत जाना देखने पुराने लाटरी के अड्डे | 
क्योकि सरकार ने बंद कर दीं हैं लॉटरियाँ   | 
और खोल दिए है उनकी जगह अंग्रेजी शराब की दुकानें | 

तुम जाना शहर के महंगे स्कूलों के गेट की सड़क पर जहाँ चमकीली गाड़ियों से उतर रहें हो अमीर लोगों के बच्चे | 
वहाँ देखना तुम फुटपाथ से सटा पुरानी स्कूटी लिए खड़ा होगा कोई बाप | स्कूटी जिसकी आसान क़िस्त अभी भी जारी होगी  | 
बाप जो अपनी औकात से कहीं ज्यादा बड़ा दाँव खेल रहा है अपने बच्चों पर | 
अगर इस जुआरी बाप का दाँव सही पड़ गया तो वो कल होगा कामयाब बच्चों का होशियार पिता  | 

और अगर गलत पड़ा दाँव, तो शून्य में ताकते कटेगा उसका बुढ़ापा | 
और वो मर जायेगा बेवक़्त किसी ऐसी बीमारी से जो कोई गंभीर बीमारी भी न होगी | 

हिंदुस्तान में बच्चों की पढाई पर खेला जाने वाला जुआ दुनिया का सबसे बड़ा जुआ है | 
इसके कद का जुआ दुनिया के किसी कोने में नहीं है ! 

मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026

दर्शनीय

यूँ ही चलते फिरते 

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 और फिर उम्र के साथ सीखना होता है आपको ये हुनर भी कि आप देख तो ले उन दृश्यों को जो दर्शनीय हैं पर देखे कुछ इस हिसाब से कि कोई देख न पाए कि आप भी देखते है !

शनिवार, 10 अक्टूबर 2026

जालिम हूँ मैं !

 जालिम हूँ मैं !

मार देता हूँ अपनी खुशियाँ कुछ ऐसे भी | 

गुजरता हूँ अकेले कई बार , खूबसूरत नज़ारो से | 

होना चाहता हूँ खुश | 

और फिर सोच देता हूँ कि कोई होता साथ , जो देखता मुझे खुश होते हुए !

कोई गुनाह है क्या , औसत होना

कोई गुनाह है क्या , औसत होना 

दोयम होना किताबो में , खेलों में 

नहीं तो !

तो फिर गुनाह है क्या ,

एक इज्जत की नौकरी का हक़दार होना ?

नहीं बुनियादी हक़ है ये तो !


तो गुनाह होगा एक जवान आदमी का , 

पड जाना प्रेम में , उम्र के गुलाबी सालों में !

नहीं , कुदरती है ये भी !


तो फिर स्वार्थी होगा वो आदमी 

जो कहता है कि जीवन उसका छोटा है और जीना चाहता है वो अपनी शर्तो पर 

नहीं , जीवन तो उसका है | 

तो फिर ?

गुनाह ये है कि ये आदमी भीड़ में पैदा हुआ है !

जहाँ आदमी सब कुछ है  गाजर , मूली , कद्दू , आवारा , नाकारा | 

बस , आदमी नहीं है ! 


मेरे जंगल का आदमी, आदमी क्यों नहीं है ?

बुधवार, 7 अक्टूबर 2026

गरीबी का खौफ

 तुम तोड़ तो दोगे गरीबी का चक्र , अपनी मेहनत से | 

लेकिन तुम नहीं तोड़ पाओगे उसका खौफ ! 

खौफ, जो दो पीढ़ियों तक चलता है | 


जब भी तुम कहोगे कि तुम लौट जाना चाहते हो | 

तो तुम्हारे अपने ही कहेंगे तुमसे , कि लौट तो आओ ,पर वापस आकर करोगे क्या ?

और उनके चेहरों की फ़िक्र मजबूर करेगी तुम्हे कि तुम बदस्तूर जारी रहो अपने हालातो में | 

क्योंकि  हालात तुम्हारे जो भी हों , इन्ही हालातों की वजह से घर के हालात बदले हैं | 

तुम तोड़ तो दोगे गरीबी का चक्र , अपनी मेहनत से | 

लेकिन तोड़ नहीं पाओगे उसका खौफ | 



सोमवार, 5 अक्टूबर 2026

अभाव

झूठमूठ का ही सही , कुछ अभाव जरूर रखना अपने बच्चों के जीवन में | 
वरना , वे टिक नहीं पाएंगे उनके सामने , जो पहुंचेंगे उन तक अभावों का दरिया पार कर | 

          

शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2026

राब्ते

वे कहते है कि तुम अब बदल गए हो , 
पहले जैसे नहीं रहे | तो मैं नहीं कहता कि तुम कौन सा पहले जैसे हो | 
मैं सिर्फ हम्म कहता हूँ | 
वे कहते है कि मैं फ़ोन नहीं करता तो मैं नहीं कहता कि वे कौन सा करते है | 
मैं सिर्फ माफ़ी मांग लेता हूँ | 

फिर मैं राय लेता हूँ उनकी उन मुद्दों पर जिन पर मुझे कोई खास राय नहीं चाहिए !
और मैं सुनिश्चित करता हूँ कि 
वे जब मुझसे बतियाये तो एक दो इंच ऊँचे होकर ही जाए 
और कुछ इस तरह बचा रखे है मैंने राब्ते लोगो से !
वर्ना मैं निपट अकेला ही हूँ | 


बाप घिस जाते है वक़्त से पहले ही

बाप घिस जाते है वक़्त से पहले ही   जल्दी करना नौजवान , पहुंचने में , जहाँ भी कही तेरी मंजिल हो |  क्योंकि मायें तो साबुत रह जाती है कई बार | ...