गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026
जुआरी आदमी
मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026
दर्शनीय
यूँ ही चलते फिरते
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और फिर उम्र के साथ सीखना होता है आपको ये हुनर भी कि आप देख तो ले उन दृश्यों को जो दर्शनीय हैं पर देखे कुछ इस हिसाब से कि कोई देख न पाए कि आप भी देखते है !
शनिवार, 10 अक्टूबर 2026
जालिम हूँ मैं !
जालिम हूँ मैं !
मार देता हूँ अपनी खुशियाँ कुछ ऐसे भी |
गुजरता हूँ अकेले कई बार , खूबसूरत नज़ारो से |
होना चाहता हूँ खुश |
और फिर सोच देता हूँ कि कोई होता साथ , जो देखता मुझे खुश होते हुए !
कोई गुनाह है क्या , औसत होना
कोई गुनाह है क्या , औसत होना
दोयम होना किताबो में , खेलों में
नहीं तो !
तो फिर गुनाह है क्या ,
एक इज्जत की नौकरी का हक़दार होना ?
नहीं बुनियादी हक़ है ये तो !
तो गुनाह होगा एक जवान आदमी का ,
पड जाना प्रेम में , उम्र के गुलाबी सालों में !
नहीं , कुदरती है ये भी !
तो फिर स्वार्थी होगा वो आदमी
जो कहता है कि जीवन उसका छोटा है और जीना चाहता है वो अपनी शर्तो पर
नहीं , जीवन तो उसका है |
तो फिर ?
गुनाह ये है कि ये आदमी भीड़ में पैदा हुआ है !
जहाँ आदमी सब कुछ है गाजर , मूली , कद्दू , आवारा , नाकारा |
बस , आदमी नहीं है !
मेरे जंगल का आदमी, आदमी क्यों नहीं है ?
बुधवार, 7 अक्टूबर 2026
गरीबी का खौफ
तुम तोड़ तो दोगे गरीबी का चक्र , अपनी मेहनत से |
लेकिन तुम नहीं तोड़ पाओगे उसका खौफ !
खौफ, जो दो पीढ़ियों तक चलता है |
जब भी तुम कहोगे कि तुम लौट जाना चाहते हो |
तो तुम्हारे अपने ही कहेंगे तुमसे , कि लौट तो आओ ,पर वापस आकर करोगे क्या ?
और उनके चेहरों की फ़िक्र मजबूर करेगी तुम्हे कि तुम बदस्तूर जारी रहो अपने हालातो में |
क्योंकि हालात तुम्हारे जो भी हों , इन्ही हालातों की वजह से घर के हालात बदले हैं |
तुम तोड़ तो दोगे गरीबी का चक्र , अपनी मेहनत से |
लेकिन तोड़ नहीं पाओगे उसका खौफ |
सोमवार, 5 अक्टूबर 2026
अभाव
शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2026
राब्ते
बाप घिस जाते है वक़्त से पहले ही
बाप घिस जाते है वक़्त से पहले ही जल्दी करना नौजवान , पहुंचने में , जहाँ भी कही तेरी मंजिल हो | क्योंकि मायें तो साबुत रह जाती है कई बार | ...
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झूठमूठ का ही सही , कुछ अभाव जरूर रखना अपने बच्चों के जीवन में | वरना , वे टिक नहीं पाएंगे उनके सामने , जो पहुंचेंगे उन तक अभावों का दरिया प...
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