डरता हूँ मैं कई बार नौकरी छोड़ देने के विचार से
तमाम थकान के बावजूद |
इस विचार से कि उस दुनिया में जहाँ हर वो आदमी जो काम पर नहीं है , नाकाम है !
उस दुनिया में कौन सा मुखौटा लेकर जाऊँगा |
अगर मेरे पास बताने के लिए कोई काम नहीं होगा
क्या तब भी ये दुनिया मुझे किसी काम का आदमी समझेगी ? डरता हूँ मैं |
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