शनिवार, 8 अगस्त 2026

मेरी पीढ़ी के लोग



लोग , मेरी पीढ़ी के लोग 

जो मानते रहे और जीते रहे इस फलसफे को कि रहा जा सकता है  एक ही घर में बिना प्यार क्योकि खुद के वजूद से कही बड़ा होता है परिवार 

पीढ़ी आखिरी पीढ़ी जिसके नितम्बों पर आज भी छपे है बचपन में अनुशासन में बाँधने को बरसी कमचियों के निशान 

पीढ़ी  जिसने अपनी पहली तनख्वाह से खरीदा था अपना पहला फ़ोन  

पीढ़ी जो छिपाती रही माँ की बात बीवी से , बीवी की बात माँ से इस उम्मीद कि क्या हर्ज़ है जो जुड़ा रहे परिवार रहकर थोड़ा मौन 

लोग  जिन्होंने अपने शौक अपनी इच्छाएं अपनी पसंद सब बाँध दिया खूंटी पर 

जुट गए ऐसे कामों में जहाँ रोज पीना होता है खून का एक घूँट 

देखता हूँ क्षितिज में कैसे नए आत्ममुग्ध लोग उतरे आ रहे हैं 

सब कुछ सहकर जीने वाली मेरी पीढ़ी के लोग अब बुढ़ा रहें हैं 



कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

टिप्पणी करें -

मेरी पीढ़ी के लोग

लोग , मेरी पीढ़ी के लोग  जो मानते रहे और जीते रहे इस फलसफे को कि रहा जा सकता है  एक ही घर में बिना प्यार क्योकि खुद के वजूद से कही बड़ा होता ह...