जानते हो मुझे ऐसे कैफे में बैठ कर चाय पीना क्यों पसंद है | वो यूँ के ऐसे ही चाय के साथ बैठ मैंने न जाने कितने ही लोगो को खोला है | ऐसे लोग जो खुशहाल शादियों में है पर जिन्होंने सालों से अपने पार्टनर का हाथ तक नहीं थामा | लोग जो ऊँचे ओहदो पर है पर उनका बस चले तो सब कुछ छोड़छाड़ कर पहाड़ भाग जाए ,अकेले।
लोग जिनकी अपने भाई बहनो से बात तक नहीं होती , प्रॉपर्टी के चक्कर में |
चाय की चुस्कियों के साथ पीना सीख रहा हूँ मैं उनका अकेलापन , उनका गिल्ट , उनकी बेबसी , उनका ट्रामा |
हर इंसान भरा बैठा है | मैं सीख रहा हूँ उसे खोलना , हर एक कप चाय के साथ |
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