हर बार तुम तोड़े नहीं जाओगे, प्यार में किये गए इंकार से !
कई बार तोड़े जाओगे, प्यार के इकरार से |
इकरार जो उस वक़्त आएगा ,जब न मौसम होगा, और ना ही हालात |
तुम्हे हलाक कर जायेगा कोई, इस एहसास से कि काश तुमने कोई संजीदा कोशिश की होती |
डरना तुम ऐसे इकरार से , और रोक देना उसे कहने से पहले ही , जो आये तुम्हारे पास ऐसे किसी मिज़ाज़ से |
क्योकि प्यार में मिला इंकार मामूली सा एक तमाचा है |
लेकिन गलत वक़्त का इकरार , देह में छूटा काँटा है !
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