अपने किसी परमानेंट की तलाश में |
हाँ , तुम बनना उनका टाइम पास , मगर इस हुनर से उनकी रूह की सलबटों में छुपा आओ कही अपना रंग |
रंग जो वक़्त के साथ उतरता जाए गहरा और गहरा | कुछ वैसे जैसे खजूर का काँटा वक़्त के साथ देह में गहरा और भी गहरा धँसता जाता है |
और फिर तुम देखना दूर से ही कि कैसे उनका परमानेंट फीका पड़ता जाता है तुम्हारे साथ किये गए टाइम पास की याद में |
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