बुधवार, 30 सितंबर 2026

ऊब


मैंने समझाया उसे कि मत देखा करो ये रील्स !

मेरे लिए , अपने लिए , अपने रिश्ते के लिए !

क्योकि खौफ है मुझे कि एक दिन तुम ऊब जाओगी मुझसे 

और ये रील्स की आदत , सहने ना देगी तुम्हे ऊब  | 


बैठी रहा करो कभी मेरे पास उबासियाँ लेते हुए 

तब भी जब कि मेरा हाथ ठंडा हो या खुश्क हो | 

 वो यूँ के खरसाह जरूरी है , पहले बारिश के तभी फुलबारी सजती है | 

रोज रोज बारिश होने में केवल घास ही उगती है | 

दीर्घायु भव: 


बहुत जरूरी है ऊब के बाबजूद बने रहना रिश्ते में , बदकिस्मती से इंसान की ऊब बर्दाश्त करने की कूबत कम हो रही है | 


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