मैंने समझाया उसे कि मत देखा करो ये रील्स !
मेरे लिए , अपने लिए , अपने रिश्ते के लिए !
क्योकि खौफ है मुझे कि एक दिन तुम ऊब जाओगी मुझसे
और ये रील्स की आदत , सहने ना देगी तुम्हे ऊब |
बैठी रहा करो कभी मेरे पास उबासियाँ लेते हुए
तब भी जब कि मेरा हाथ ठंडा हो या खुश्क हो |
वो यूँ के खरसाह जरूरी है , पहले बारिश के तभी फुलबारी सजती है |
रोज रोज बारिश होने में केवल घास ही उगती है |
दीर्घायु भव:
बहुत जरूरी है ऊब के बाबजूद बने रहना रिश्ते में , बदकिस्मती से इंसान की ऊब बर्दाश्त करने की कूबत कम हो रही है |
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