शुक्रवार, 24 जुलाई 2026

असली मेजोरिटी

 ये जो शक्ति प्रदर्शन करते हैं न लोग , मुद्दे लपक कर भीड़ के बीच में मंच पर मेजोरिटी का रहनुमा बन रहे होते है , ये सब झूठे है | 

कोई भी भीड़ जो प्रदर्शन करती है न कितनी भी बड़ी क्यों न हो मेजोरिटी नहीं होती |  

असली आदमी जो मेजोरिटी में है  वो वह आदमी है जो प्रदर्शन के चलते रास्ता जाम होने की वजह से गलियों से निकल काम पर पहुंच रहा होता है | 

उसकी जिंदगी का मिशन होता है | परिवार के लिए रोटी और अदद सम्मान जुटाना ,बस | 

और इस मिशन के लिए वो न सरकार को ताकता है न यूनियन को न किसी मसीहा को, न इंटेल्लेक्टुअल्स को , न कम्युनिस्ट्स को  | 

वो चुप चाप निकल रहा होता है सब जानते हुए कि कौन सा नारा खोखला है कौन ढोंगी है , कौन उछाला जा रहा है कौन चमकाया  जा रहा है | 

 वो देख रहा होता है कैसे मीडिया बोनो को महामानव बना पेश कर रहा है | कैसे बिना कार्ल मार्क्स पढ़े लोग समाजवादी बने है कैसे गाँधी  को जाने बिना  लोग प्रजातान्त्र पर भाषण पेल रहे होते हैं |  

वो सब जानता है और सब जानने के बाबजूद वह सुकून  चाहता है | सिर्फ सुकून | 



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