गुरुवार, 23 जुलाई 2026

भिंचाले में फंसा तकिया

आज सुबह उठा तो यकायक ख्याल आया कि एक लम्बे अरसे से मुझे सपने ही नहीं आते | 
काम से लौटता हूँ , कुछ खाता हूँ और बिस्तर पर गिर जैसे मर जाता हूँ | अगली सुबह तक के लिए |
तकिया , जिसे बाँहों में भर मैं तुम्हारी यादें लिए नींद में उतराता था , और जो महीनों से बिस्तर से गायब था  | पाया कि वो तकिया  बिस्तर और दीवार के भिंचाले में फँसा है | किसी यतीम सा | 
एक मकड़ी ने उस पर एक महीन सफ़ेद जाला बुन अपनी मिलकियत का दावा  ठोक दिया है |

दिन भर सोचता रहा क्या कुछ ऐसा  दूँ  कि  तुम लौट आओ | 
पूरी ना सही , इतनी भर कि सपने लौट आये | 
इतनी  भर कि भिंचाले में फंसा तकिया वापस बिस्तर लौट आये आए | 
सोचता रहा कि लिखू तुम्हे कि मेरा तकिया पूछता है कि तुम्हारा तकिया कैसा है !

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भिंचाले में फंसा तकिया

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