काम से लौटता हूँ , कुछ खाता हूँ और बिस्तर पर गिर जैसे मर जाता हूँ | अगली सुबह तक के लिए |
तकिया , जिसे बाँहों में भर मैं तुम्हारी यादें लिए नींद में उतराता था , और जो महीनों से बिस्तर से गायब था | पाया कि वो तकिया बिस्तर और दीवार के भिंचाले में फँसा है | किसी यतीम सा |
एक मकड़ी ने उस पर एक महीन सफ़ेद जाला बुन अपनी मिलकियत का दावा ठोक दिया है |
दिन भर सोचता रहा क्या कुछ ऐसा दूँ कि तुम लौट आओ |
पूरी ना सही , इतनी भर कि सपने लौट आये |
इतनी भर कि भिंचाले में फंसा तकिया वापस बिस्तर लौट आये आए |
सोचता रहा कि लिखू तुम्हे कि मेरा तकिया पूछता है कि तुम्हारा तकिया कैसा है !
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