सोमवार, 19 सितंबर 2022

पहली दफा



जो दूसरों के पास है , वही सब अपने बच्चों के लिए जुटाने की जद्दोजहद | अपनी ऊर्जा-सामर्थ्य  से  मिडिल क्लास आदमी यही  साधता है | पर एक मलाल है | मलाल ये कि नौकरी से समय मिलता तो मैं बच्चों को कुछ सिखाता | एक विचार , कि माँ , स्कूल टीचर्स, दादा दादी , ये सब समझाते तो होंगे |  अपनी कूबत अपनी इच्छा के हिसाब से | पर क्या वो सब , जो मैं बता पाता !

आप इसे गुमान कहिये  | पर  चम्पक , आविष्कार , मनोहर कहानियाँ , सुपर कमांडो ध्रुव , नागराज से होते हुए उपकार ,प्रतियोगिता दर्पण  ,इंडिया टुडे , दी हिन्दू ,  फिर  टेड टॉक्स , न्यूज़ डिबेट्स से निकल  दाँते ,लियो टॉलस्टॉय , मैक्सिम गोर्की  तक को छूने वाले आदमी को आप थोड़ी नरमाई से नापिये | उसे इस अहसास के साथ जीने की मोहलत दीजिये कि जिंदगी में तीर मारे हों या न मारे हों , विषयवस्तु की पकड़ उस अधेड़ को है | इतना कुछ तो उसके तरकश में है कि एक बच्चे की जीवन दिशा की प्रस्तावना तो बांध ही दे |  

और इसी अहसास से तरबतर वो  आदमी , दस साल के बच्चे का हाथ पकडे सिंगापुर के एक लोकल मार्किट से गुजरा जा रहा था   |बच्चा जो कि अभी अभी विलायत आया था  | पहली दफा , नयी आँखें  |  रविवार की अलसाई सुबह  | ताजा सब्जी , फल, दूध , अंडे ,ब्रेड यही सब रोजमर्रा की चीज़े उठाए कुछ अच्छे पति , वृद्ध  गृहणियां , कम उम्र काम वाली बाइयाँ ,  | नुकक्कड़ो पर , मुनिसिपलिटी की सीमैंट की बैंचों पर ,  कॉफी हाउस के बाहर बूढ़े जमा थे |  बूढ़े जो काफी बूढ़े थे | 


"अच्छा , तुमने ऑब्ज़र्व किया बेटा | सिंगापुर में अपने देश के मुकाबले कितने ज्यादा बूढ़े लोग दीखते है ? "

"सोचो , ऐसा क्यों हैं ?"

और फिर वो दिमाग में गढ़ने लगा कि बच्चे को कुछ समझायेगा   - विकसित देश , क्वालिटी ऑफ़ लाइफ , हेल्थ केयर , लोंगेटिविटी इसी सब के बारे में | 

बच्चे ने सोचा , एक दो दुकान के होर्डिंग पढ़े और  फिर बोला " हाँ , तो क्या पापा , सिंगापुर भी ब्लू जोन में आता है ?"

"ब्लू ज़ोन ?" 

"हाँ , ब्लू जोन , जिसमे जापान आता है , इटली आता है | "

"ओह , ये क्या होता है ?" आदमी  ने इतना कहा पर उसका दिमाग ब्लू जोन , जापान , दीर्घायु इन सबका युगुम बनाने में कामयाब रहा | धीरे से चलते चलते गूगल से कन्फर्म किया | 

"तुमने ये सब कहाँ से सीखा ?"

"पापा आप यू ट्यूब पर नास डेली को फॉलो नहीं करते क्या ? आपको करना चाहिए |  "


मार्किट के किनारे बबल टी की एक एक स्टाल की तरफ इशारा करते हुए बच्चे ने  कहा " पापा , वाओ , बबल टी मिलती है यहॉ !मैंने कभी पी नहीं | ट्राई करें ?" 

आदमी ने पूछा नहीं कि जब कभी पी ही नहीं , अपने शहर में मिलती भी नहीं तो ये 'वाओ !बबल टी ' कहाँ से आया |   रेमैन , किमची ये सब शब्द इसकी वोकैब में आये कहाँ से | 

 हाँ, बबल टी स्टाल की तरफ जाते हुए उसने सोचा कि उसकी दुनियादारी की समझ सिकुड़ रही है  | दुनिया बदल गयी है तरीके बदल गए है , इनफार्मेशन कई गुना तेज रफ़्तार से दौड़ रही है |  आप जो खाली छोड़ रहें हैं ,यू ट्यूब उसे भर रहा है | 

"पापा आपको अगर इंटरेस्टिंग फैक्ट्स चाहिए ना तो मैं  आपको कुछ चैनल्स बता दूंगा | सब्सक्राइब कर लेना | " 

"ठीक है बेटा|  अच्छा  सुनो , सिंगापुर ब्लू जोन में नहीं आता | वो कुछ दूसरी थ्योरी है | बाद में डिटेल में बताऊंगा | "बबल टी लगे स्ट्रा को घुमाते हुए आदमी ने कहा | 

 लेकिन पहली दफा , गुमान में तरबतर रहने वाले आदमी को  ऑउटडेटेड हो चलने ,और फिर  अप्रासंगिकता की ओर लुढ़क जाने का का डर सताने लगा है    | 


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