मैं बचपन से ही शुद्ध शाकाहारी रहा हूँ ,घर का वातावरण वैष्णव है और सात्विक आहार से ही
इस शरीर का निर्माण हुआ है|
मांसाहार का विचार कभी मन मैं कोंधा तक नहीं |उलटे मांसाहार करने वालो से घर्णा रही है ...
क्यों कर ,आप अपने स्वाद के लिए किसी प्राणी के प्राण हरण तक उतर सकते है |
पर ..पिछले दिनों NGC में Man Vs Wild के एपिसोड देख देखकर ऐसा बुखार चढ़ा , कि इंसान को छोड़ सब कुछ आहार श्रंखला का हिस्सा नज़र आने लगा ..
सिंगापुर आकर तो जैसे पर उग आये | बएर ग्रिल्स ने दिमाग को पूरी तरह हाई-जैक कर लिया और मैं अपने आपको किसी अफ्रीका के भूखे शेर की तरह समझने लगा ,जो हर किसी हिलने चलने वाली चीज़ को अपना निवाला बनाने का माद्दा रखता है..
सिंगापुर में मांसहरियो के लिए विकल्पों की पूरी श्रंखला है | आप कुछ कल्पना कीजिये ,अमूमन आपको मिल ही जायेगा ..
मगरमछ का मांस ,मेंढक,सांप, नाना प्रकार की मछलिया|
चिकन और मछली को तो लोग शाकाहार में ही गिन लेते है..
मेरी शुरुआत हुई चिकन से | धीरे धीरे मछली सुलभ उपलब्धि से मतस्यहरी बन गया |
केकड़े की प्रसिद्धी सुन कर उसका जलपान भी कर बैठा |
बेहतर होता अगर ये अनुभव लेने का बुखार यही उतर जाता..
पर नहीं ..पिछने रविवार को मेढक खाने का लक्ष्य बना | दोस्तों के साथ पास के ही फ़ूड कोर्ट में जाकर बड़े ही चाव से
"फरोग लेग्स विद स्प्रिंग ओनियन " आर्डर कर बैठा |
बड़े ही चाव से हमने उस मरहूम मेंढक की चिली सास में डूबी टांगो का लुत्फ़ उठाया | स्वाद कुछ कुछ चिकन जैसा ही था |
लगा एक और उपलव्धि हासिल कर ली ,जिसका गान मैं वापस इंडिया जाकर दोस्तों में कर सकूँगा .
पर नियति को कुछ और ही मंजूर था..
शाम होते होते ,शरीर के अन्दर प्रतिरोध के स्वर उभरने लगे |
पूरे शरीर पे बड़े बड़े लाल चिकत्ते उभर आये और खुजली होने लगी | बुखार ने आ घेरा | सोमवार के सुबह कल तक का ये अफ़्रीकी शेर ,बिस्तर पे औंधे मुह पड़ा कराह रहा था |
ना चाहते हुए भी ,चिकत्सक का दरवाजा खटखटाना ही पड़ा...
चिकत्सक महोदय ने जांच पड़ताल की और चंद सवालात किये |जल्द ही उन्होंने ये ऐलान कर दिया ,कि ये सब उस मेंढक
भक्षण का ही नतीजा है.|मैं एक प्रकार की फ़ूड अलर्जी का शिकार हुआ था..
चिकत्सक ने मुझे समझाया कि मेरा शरीर तंत्र इन ऊट-पटाक भोज्य सामग्री के लिए नहीं बना है ,सो बेहतर है इस सब से परहेज किया जाये..
खैर डाक्टर महोदय की बात हमे जंची और हमने ये सब एक्सपेरिमेंट छोड़ फिर से शाकाहार अपना लिया है ..
बेडोक साउथ अवेनुए -२ के फ़ूड कोर्ट में लटके मेंढक ,केकड़े,मुर्ग अब दूसरे ग्राहकों का निवाला ही बनेंगे |
मेरी भोजन सूचि से ये नाम सदा के लिए मिट चुके है ...
सात्विक प्राण लौट आया है और कालांतर में भक्षण किये तमाम प्राणियों की आत्माओ की शांति के लिए इश वंदना
में समर्पित है |
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई भी बात
तुम समझा सकते हो दुनिया को , लेकिन समझा नहीं पाओगे किसी अपने को ही , कोई भी बात ! तुम समझाओ दुनिया को कि तुम अपनाते हो 50-30 -20 का रूल जब ...
-
कोई गुनाह है क्या , औसत होना दोयम होना किताबो में , खेलों में नहीं तो ! तो फिर गुनाह है क्या , एक इज्जत की नौकरी का हक़दार होना ? नहीं बुनि...
-
झूठमूठ का ही सही , कुछ अभाव जरूर रखना अपने बच्चों के जीवन में | वरना , वे टिक नहीं पाएंगे उनके सामने , जो पहुंचेंगे उन तक अभावों का दरिया प...
-
जालिम हूँ मैं ! मार देता हूँ अपनी खुशियाँ कुछ ऐसे भी | गुजरता हूँ अकेले कई बार , खूबसूरत नज़ारो से | होना चाहता हूँ खुश | और फिर सोच देता...


Accha raha jaldi akal aa gayi
जवाब देंहटाएंJaan bachi to lakho paye
जवाब देंहटाएंLaut k buddhu ghar ko aaye.