मंगलवार, 3 अक्तूबर 2017

तेरे घर की , मेरे घर की



"चलाओ तुम अपनी, जितना मर्ज़ी है चलाओ |  खूब चलाओ | मैं भी देखूं ,  आखिर कब तक अपनी चलाओगे " |
 मिर्ची के छोंक से तीखे , नश्तर से  चुभते ये बोल,  रसोई से उठ घर की फ़िज़ा में तैर गए |
और गुस्सा केवल वाणी  में ही नहीं था  ! लाइटर की आवाज़ , फ्राई पेन के स्टोव  रखने की आवाज़ , जूठी  प्लेट्स  के सिंक में रखे जाने की आवाज़ ! सबसे के सब में एक रौद्रता, भिड़ जाने की , आर पार करने की चाह |
यूँ कह लीजिये कोई बबंडर सा था |

और दुश्मन ? दूसरी ओर  सौफे पे पसरा था | इकहरा लेकिन जिब्राल्टर की चट्टान सा मजबूत इरादा | लापरवाह ! मूड यूँ था कि अजी आओ , टकराओ , बिखर जाओ , हम ऐसे ही खड़े रहेंगे |
जबाब लाज़िम था सो दिया भी गया " गलत होऊ या सही | जो मुझे सही लगेगा वही करूँगा | तुमसे हेल्प नहीं मागूंगा | तुम हेल्प  मत करना |  " 

और बच्चे ?  पुरुष नियति का मर्म ये भी है कि जब जब मुकाबला बराबरी या जीत में छूटने  को होता है , स्त्री बच्चो को ढाल  की तरह इस्तेमाल करती है |   दाव चलता न देख जालिम ने पैतरा बदल दिया |

कुलदीपक  ने  डिमांड नहीं की ,  बिना  फरमाइश उसके सामने उसके फेवरेट नूडल्स परोसे गए  और ममता का तड़का लगा के बालों पे हाथ फिरा बोला गया  " बेटा , तेरे पापा तो  मानेंगे नहीं अपनी | तू जल्दी से बड़ा हो जा | तू ही संभालेगा घर | "

कुल जमा साढ़े चार साल के कुलदीपक ने पुरुष को ऐसे घूरा  जैसे दरोगा किसी मुल्जिम को ,  जो अभी अभी ताज़ा अपराध करके आया हो |
 जायज भी है कौन चाहेगा कि दूसरे  के कंधो का बोझ अपने ऊपर उठाया जाए |

खैर ,घंटे  दो घंटे  में बादल छंट गए  ,  गृहस्थी झूलती झालती अपने ढर्रे पे चल निकली |
टी वी के किसी प्रोग्राम को देख घर में ठहाके भी गूंझे |

माहौल पिंघलता देख कुलदीपक ने कहा " मम्मी मेरा अभी भी बड़ा होना जरूरी है क्या !"
मतलब भाव ये था कि अब जबकि सब नार्मल हो गया मुझे बड़े होने से छूट मिलेगी क्या !

 "ठीक है बेटा , तू अभी बच्चा ही रह | "

हँसी बहुत आयी पर पुरुष मन में पी गया | बच्चे आजकल ओवर सेंसिटिव हैं ! बुरा मान जाते हैं |

कॉलेज टाइम की किसी प्लेलिस्ट का गाना चल  रहा था " 'इट्स नो सैक्रिफाइस.... नो सैक्रिफाइस एट आल... "

ये है गृहस्थी , तेरे घर की , मेरे घर की |


                                                                      सचिन कुमार गुर्जर
                                                                      ०३ अक्टूबर २०१७


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