शनिवार, 18 जुलाई 2026

और फिर एक दिन

कितने ही प्रेम निवेदन ठुकरा दिए मैंने | 

इस गुमान में कि कही कोई फ्यूचर में है जो सबसे बेहतर है और जो मेरे इंतज़ार में है | 

कितनी ही यात्राओं के प्रस्ताव जो मेरे दोस्तों ने रखे , मैंने नकार दिए , इस हुनक में कि अभी समय  नहीं है | 

कितने ही पहाड़ , समंदर , झरने जो मेरी जद में थे , मैंने नहीं घूमे , इस मकसद में कि पैसा बचाना है | 

कितने शगल , कितने शौक जो मुझे जिंदादिली  से जीने का एहसास दिला सकते थे , मैं सबको रौंधता चला गया | 

इस गलतफहमी में , कि एक दिन मेरा दौर आएगा , अभी उम्र पड़ी है | 

आँखो पर पड़े पर्दो से मैंने देखा कि मेरी जवानी का झरना सदानीरा है , जो बस बहता ही जायेगा | बहता ही जायेगा | हमेशा | 

और फिर एक दिन मैं बूढा हो गया | 


Life is shorter than it appears . Live it.

          An original by Sachin Kumar Gurjar


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