शनिवार, 15 अगस्त 2026

उत्सव

जानती हो ये उत्सव , ये त्यौहार हमे अच्छे क्यों लगते हैं ? 

शायद इसलिए क्योकि ये रोज रोज नहीं आते | दुर्लभ है , लघु हैं | 

रोज रोज कहाँ टांगी जाती है ऐसी रंगीन कंदीले | 

और ये सोचकर मैं सुकून पाता हूँ कि शायद तुम अब भी उत्सव सा मानती होंगी अपने मिलन का 

जो उत्सव की ही तरह लघु था , दुर्लभ था | 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

टिप्पणी करें -

उत्सव

जानती हो ये उत्सव , ये त्यौहार हमे अच्छे क्यों लगते हैं ?  शायद इसलिए क्योकि ये रोज रोज नहीं आते | दुर्लभ है , लघु हैं |  रोज रोज कहाँ टांगी...