जानती हो ये उत्सव , ये त्यौहार हमे अच्छे क्यों लगते हैं ?
शायद इसलिए क्योकि ये रोज रोज नहीं आते | दुर्लभ है , लघु हैं |
रोज रोज कहाँ टांगी जाती है ऐसी रंगीन कंदीले |
और ये सोचकर मैं सुकून पाता हूँ कि शायद तुम अब भी उत्सव सा मानती होंगी अपने मिलन का
जो उत्सव की ही तरह लघु था , दुर्लभ था |
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