फिर मुझे धीरे धीरे समझ आया कि ये सबको खुश रखने की जिम्मेदारी मेरी नहीं है | और न ही मेरा इतना बूता है कि मैं सबके मूड ठीक रख सकूँ |
रिश्तों में अपने हिस्से का फ़र्ज़ निभा देने के बावजूद जो एक गिल्ट सिर पर बना रहता था न , मैंने अपने आपको उससे मुक्त कर लिया है अब
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
टिप्पणी करें -