Friday, April 16, 2010

जाने वो कैसे लोग थे , जिनके प्यार को प्यार मिला..

जाने वो कैसे लोग थे , जिनके प्यार को प्यार मिला..
हमने तो जब कलिया मांगी, कांटो का हार मिला....
आजकल रह रहकर ये गाना दिलोदिमाग में घूमता रहता है...

प्यार का जो खुमार फरबरी मार्च के महीने में किसी  नवचेतन  बेल  की  तरह   परवान  चढ़ा   था ..
अप्रैल  के  गर्म  शुष्क  मौसम  में मुरझा  गया  है|
आज  पिछले  3 महीनो  के अठखेलियो  और  अट्टहास  से  भरे  उन  तमाम  प्रयासों  पे  नज़र  डालता  हूँ   , जो अनजाने  ही  मैंने प्रेमपाश  में जकड़े  होकर  किये  ...तो प्रयास  कम  दुसाहस  ही  ज्यादा  लगते   है|
किसी  अनजान  लड़की  की  सीट  पे  जाकर  उससे  अपना  स्नेह  व्यक्त  करना  ,अपनी  उलजुलूल  फिलोस्पी  से  भरी  मेल  लिखना  , उसकी  सहेली  से  उसके  बारे  में बात करना ....क्या  क्या  नहीं  कर  डाला|
पर  वो तस  से  मस  ना  हुई| हालात  पक्ष  में ना  जाते  देख  धीरे  धीरे  आखों  पे  चढ़ा   प्रेम  चश्मा  उतरने  लगा  है |
और  जीवन  की  कड़बी  सच्चाई   एक  बार  फिर  से  समझ  में आने  लगी  है|

प्रेम  एक  ऐसी  अनुभूति  है , जिसका  अनुभव  तो आप  अपनी  मर्ज़ी  से  कही  भी , कभी  भी  दिल  की  रों  में बहकर  कर सकते  हो |इसमें  कुछ  बुरा  भी  नहीं |
जब तक  आप  दूसरे  से  भी  अपनी  अनुभूति  के अनुरूप  चलने  की  उम्मीद  ना  पाले |
यही  पे  हमसे  गलती  होती  है|
प्रेम  को हम  अपेक्षा  से  भर  देते  है|प्रेम  होना  चाहिए  निश्वार्थ , निष्काम,  बिना  शर्त ....
नहीं  तो वो प्रेम  प्रेम  नहीं  , एक  महज  सांसारिक  लेनदेन  का नाता  है|
अप्रैल  की  गर्मी  सूखी  सूनी  पड़ी  जमीन  को सुलगा  रही  है..ऐसे  में सड़क  किनारे  कतारबद्ध  खड़े  नीम  के पेड़  गर्मी  से  राहत दे  रहे  है|
और  मुझे  निश्वार्थ  सेवाभाव , निष्काम  प्रेम  का पाठ  पढ़ा  रहे  है|
मन  शांत  है , अपेक्षित  प्यार ना  पाकर  मन  में जो झुझलाहट   थी ..वो जा  चुकी  है...मन  आज  फिर  मनमौजी  है|
खुला  है, स्वतंत्र  है , इच्छाओ  से  मुक्त,  उन्मुक्त  उड़ान  भरने  को आतुर  है...
कल  तक  ऑफिस  की  कैंटीन   में  जो चेहरा  मुझे  ख़ास  लगता  था ,खीचता  था  , अब  आम  लगने  लगा  है|
सात्विकता लौट आई है |

7 comments:

  1. Bada achha likha hai!Sanjeedgi poorn!

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  2. आपके ब्लॉग पर आकर कुछ तसल्ली हुई.ठीक लिखते हो. सफ़र जारी रखें.पूरी तबीयत के साथ लिखते रहें.टिप्पणियों का इन्तजार नहीं करें.वे आयेगी तो अच्छा है.नहीं भी आये तो क्या.हमारा लिखा कभी तो रंग लाएगा. वैसे भी साहित्य अपने मन की खुशी के लिए भी होता रहा है.
    चलता हु.फिर आउंगा.और ब्लोगों का भी सफ़र करके अपनी राय देते रहेंगे तो लोग आपको भी पढ़ते रहेंगे.
    सादर,

    माणिक
    आकाशवाणी ,स्पिक मैके और अध्यापन से सीधा जुड़ाव साथ ही कई गैर सरकारी मंचों से अनौपचारिक जुड़ाव

    अपनी माटी

    माणिकनामा

    अपनी माटी ब्लॉग अग्रीगेटर

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  3. wah Sachin ji ,maja aagaya ,
    aapney har baat dil khol kar kah di ,wonderful,seasons ke dwara itna kah dalna gazab hi hai.swagat blogjagat mey.
    dr.bhoopendra
    jeevansandarbh.blogspot.com

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  4. जाने वो कैसे लोग थे , जिनके प्यार को प्यार मिला..
    हमने तो जब कलिया मांगी, कांटो का हार मिला....बेहद खूबसूरत और शायद मनहूस भी. मीठा जहर है यह गीत. :)

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  5. हिन्दी ब्लॉगजगत के स्नेही परिवार में इस नये ब्लॉग का और आपका मैं ई-गुरु राजीव हार्दिक स्वागत करता हूँ.

    मेरी इच्छा है कि आपका यह ब्लॉग सफलता की नई-नई ऊँचाइयों को छुए. यह ब्लॉग प्रेरणादायी और लोकप्रिय बने.

    यदि कोई सहायता चाहिए तो खुलकर पूछें यहाँ सभी आपकी सहायता के लिए तैयार हैं.

    शुभकामनाएं !


    "टेक टब" - ( आओ सीखें ब्लॉग बनाना, सजाना और ब्लॉग से कमाना )

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  6. इस नए चिट्ठे के साथ हिंदी ब्‍लॉग जगत में आपका स्‍वागत है .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!

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  7. कली बेंच देगें चमन बेंच देगें,

    धरा बेंच देगें गगन बेंच देगें,

    कलम के पुजारी अगर सो गये तो

    ये धन के पुजारी वतन बेंच देगें।

    हिंदी चिट्ठाकारी की सरस और रहस्यमई दुनिया में राज-समाज और जन की आवाज "जनोक्ति "आपके इस सुन्दर चिट्ठे का स्वागत करता है . . चिट्ठे की सार्थकता को बनाये रखें . नीचे लिंक दिए गये हैं . http://www.janokti.com/ , साथ हीं जनोक्ति द्वारा संचालित एग्रीगेटर " ब्लॉग समाचार " http://janokti.feedcluster.com/ से भी अपने ब्लॉग को अवश्य जोड़ें .

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