Monday, February 8, 2010

एक नया अध्याय

महीनो से चली आ रही काम की हाय-धुन से आज कुछ राहत मिली, तो मन में कुछ नए विचार अंकुरित हुए....
सोचा , क्यों न मन में उथल पुथल करते विचारो का संकलन किया जाये..क्यों न अपने विचारो का , मेरे अपनों के विचारो के साथ मन-मंथन किया जाये..सो blogging शुरू कर दी.

अपने ऑफिस के फ्लोर से नीचे हाई-वे पे एकटक देखता हूँ |.
सरपट दौड़ती कारे, बसे, ट्रक ,मशीन ,इंसान ...हर कोई भाग रहा है..हर कोई बदहवास है. एक दुसरे को पीछे छोड़ने की होड़ में लगा है..लाइफ का सीधा सा फंडा है , जो जितना तेज भाग रहा है वो उतना ही आगे है..
साइकिल सवार  पैदल से आगे है | मोटर सवार  साइकिल सवार से आगे , लम्बी लम्बी रपटीली कारो में चलने वाले उनसे भी आगे|..
आखिर सब क्यों भागे जा रहे है?...
एक ही जवाब है ..ख़ुशी के लिए ..खुशहाली के लिए...जो जितना तेज भाग रहा है वो तथाकथित रूप से उतना ही सफल है|
पर क्या वो उतना ही खुश है? ये सवाल दुबिधा पैदा कर देता है...
शायद नहीं ...महंगी गाडियों में घूमने वाले ,नींद की गोलिया खाते मिल जायेंगे  और रिक्शा खीचने वाले मीठी गहरी
नींद सोते मिल जायेंगे|
इंसान की इच्छा ,कस्तूरी मृग की कस्तूरी की तरह ही है..जिस तरह कस्तूरी मृग ,कस्तूरी नाभि में होने के बाबजूद
उसे पाने को व्याकुल रहता है | वैसे ही इंसान अपनी इच्छाओ का शमन करने को जिन्दगी भर भागता है...
और इस कदर इच्छाओ के जाल में फ़सा रहता है, कि उसे कभी अपनी खुशियों का पिटारा खोल के देखने का
मौका ही नहीं मिलता |
पिछले दिनों में किसी Knowledge Talk Seminar में गया हुआ था| सभा में से किसी सज्जन ने वक्ता से पूछा .
"How to make life full of happiness , how to persue happiness?"
वक्ता का जबाब सुनने लायक था ..
"Your answer is in your question itself.If you make your life presuasion of happiness , you can't achieve
happiness in your life. Make your life expression of happiness. Every moment express happiness for what you hold. There lies the happiness"
बात सोलह आने सच है . भबिश्य के गर्भ में छुपी खुशियों की चाह में हम इस कदर अंधे है ,कि वर्तमान का पिटारा खोल कर कभी देखते ही नहीं...
जिसने अपना पिटारा खोल लिया , वो खुश है और रहेगा | बाकि लोगो की लाइफ "Presuasion of happiness" ही
बनी रहेगी...

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